Home » JPSC Scam: जैसे-जैसे आगे बढ़ रही जांच, परत- दर- परत खुल रहे धांधली के राज…. जानिए कैसे होता था सेटिंग-गेटिंग का खेल

JPSC Scam: जैसे-जैसे आगे बढ़ रही जांच, परत- दर- परत खुल रहे धांधली के राज…. जानिए कैसे होता था सेटिंग-गेटिंग का खेल

JPSC घोटाले में बड़ा खुलासा!रांची के अपार्टमेंट में दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर लिखवाते थे अभ्यर्थियों के उत्तर। सीनियर IAS का भी जुड़ रहा नाम।

by Kanchan Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, फर्जीवाड़े के एक से बढ़कर एक चौंकाने वाले राज बेपर्दा हो रहे हैं। जांच एजेंसी सीआईडी की पूछताछ में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के बड़े अधिकारियों और बिचौलियों ने ऐसे कई सच उगले हैं, जिन्होंने पूरे तंत्र की पोल खोलकर रख दी है।
​
सीआईडी को दिए गए बयानों के मुताबिक, फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया गया था। रांची के प्रसिद्ध हरिओम टावर में बाकायदा एक फ्लैट किराए पर लिया गया था। आरोप है कि यहां दूसरे राज्यों से एक्सपर्ट्स को बुलाकर अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को नए सिरे से तैयार कराया जाता था। जिनकी हैंडराइटिंग और उत्तर बेहतर होते थे, उनके अंक बढ़ाने का ठेका सीधे कुछ प्रोफेसरों को दिया जाता था। इस पूरे काम के एवज में लाखों-करोड़ों रुपये का लेन-देन नकद में किया जाता था।
​

ओएमआर शीट में गोलमाल

टीडीपीएल के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह ने खुलासा किया कि जो परीक्षार्थी सेटिंग करके आते थे,वे परीक्षा हॉल में ओएमआर शीट के गोलों को खाली छोड़ देते थे। बाद में स्कैनिंग और मूल्यांकन के समय उन खाली गोलों में सही उत्तर भर दिए जाते थे। यहां तक कि मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही उत्तर कुंजी चुनिंदा कर्मचारियों से साझा कर दी जाती थी ताकि अंकों में हेरफेर आसानी से की जा सके। एसीएफ, एफआरओ और सीडीपीओ जैसी कई प्रमुख परीक्षाओं में यही फॉर्मूला अपनाया गया।

​​आईएएस अफसरों की एंट्री,कोड-डीकोड का खेल

इस बड़े खेल में सिर्फ बाहरी लोग शामिल नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक गलियारों तक इसके तार जुड़े पाए गए हैं। आरोपी अभय तिवारी के मुताबिक, टीडीपीएल के कर्ताधर्ता एक बेहद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बंगले पर अक्सर आते-जाते थे। 14वीं जेपीएससी परीक्षा में भी एक शीर्ष अफसर की शह पर तीन अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने का दावा किया गया है। इसके अलावा, इंटरव्यू में अभ्यर्थियों की पहचान छिपाने के लिए दिए जाने वाले गुप्त कोड को उजागर कराने के लिए आयोग के ही कुछ लोग दबाव बनाते थे।

प्रति अभ्यर्थी 8 से 40 लाख का सौदा

इस पूरे खेल में हर स्तर की परीक्षा के लिए रेट तय थे। सीडीपीओ और एफआरओ जैसी परीक्षाओं में ओएमआर शीट बदलवाने और फर्जी तरीके से पास कराने के लिए प्रति उम्मीदवार 8 से 10 लाख रुपये वसूले जाते थे। वहीं मुख्य परीक्षा में पास कराने और इंटरव्यू में सेटिंग के लिए यह सौदा 40 से 50 लाख रुपये तक पहुंच जाता था।

​फिलहाल, सीआईडी इन बयानों और मिले सबूतों का कड़ाई से सत्यापन कर रही है, ताकि इस घोटाले में शामिल सफेदपोशों और बिचौलियों को बेनकाब किया जा सके।
Read Also: Share Market Today : शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव, Sensex और Nifty लाल निशान में 

Related Articles

Leave a Comment