
जमशेदपुर : श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है। देशभर के शिव मंदिरों में इस दौरान सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता है।
भारत में भगवान शिव को समर्पित हजारों प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर अपनी स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं और अनोखी पूजा पद्धतियों के कारण दूसरे शिव मंदिरों से अलग पहचान रखते हैं। कुछ मंदिरों में भगवान शिव का स्वरूप बेहद विशेष माना जाता है, तो कहीं सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार पूजा की जाती है। सावन के दौरान इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक गतिविधियां और भी बढ़ जाती हैं।
1. देवघर का बाबा बैद्यनाथ मंदिर
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख शिव तीर्थों में गिना जाता है। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल होने के साथ-साथ शक्तिपीठ से भी जुड़ा माना जाता है। श्रावण मास में यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन के दौरान मंदिर परिसर और कांवड़िया मार्ग पर विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।
2. उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां भगवान शिव की भस्म आरती विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्रातःकाल होने वाली इस आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाकाल स्वयंभू स्वरूप में विराजमान हैं और उनकी पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। सावन में मंदिर में विशेष पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
3. गुवाहाटी का उमानंद मंदिर
असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित उमानंद मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपने भौगोलिक स्थान के कारण देश के अन्य शिव मंदिरों से अलग दिखाई देता है।
यहां भगवान शिव की पूजा प्राकृतिक और शांत वातावरण के बीच की जाती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को नदी के रास्ते जाना पड़ता है। सावन में शिव भक्तों के लिए यह मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
4. अमरनाथ गुफा मंदिर
जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा करते हैं। अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व बेहद व्यापक है। कठिन पहाड़ी रास्ते और प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां भगवान शिव की पूजा और दर्शन का स्वरूप दूसरे मंदिरों से पूरी तरह अलग माना जाता है।
5. काशी विश्वनाथ मंदिर
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंग मंदिरों में शामिल है। धार्मिक मान्यता है कि काशी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यहां भगवान विश्वनाथ की पूजा के साथ गंगा नदी का भी विशेष धार्मिक महत्व है। सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। भक्त गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। पूरे सावन महीने में मंदिर और आसपास के क्षेत्र में विशेष धार्मिक आयोजन देखने को मिलते हैं।
सावन में इन मंदिरों की पूजा क्यों है खास
भारत के इन शिव मंदिरों की धार्मिक परंपराएं और पूजा पद्धतियां एक-दूसरे से अलग हैं। कहीं भस्म आरती विशेष पहचान है, कहीं कांवड़िये गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं, तो कहीं प्राकृतिक हिम शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यही विविधता भारत की शिव उपासना परंपरा को विशेष बनाती है। श्रावण मास में इन मंदिरों में होने वाली पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धालुओं की आस्था देश की समृद्ध धार्मिक परंपरा की झलक प्रस्तुत करती है। हालांकि अलग-अलग मंदिरों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं स्थानीय आस्था एवं पुरानी मान्यताओं पर आधारित हैं।

