Home » Jharkhand Digital Health Conclave 2026 : डिजिटल हेल्थ से अपने पैरों पर खड़ा होगा राज्य : डॉ. इरफान अंसारी

Jharkhand Digital Health Conclave 2026 : डिजिटल हेल्थ से अपने पैरों पर खड़ा होगा राज्य : डॉ. इरफान अंसारी

मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना, 10-बेडेड टेली-आईसीयू, एचआरआईएस और ई-हेल्थ पोर्टल शुरू, एआई और रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर जोर

by Nikhil Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

झारखंड में डिजिटल हेल्थ कॉन्क्लेव-2026 की शुरुआत
रांची : झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में बुधवार को डिजिटल हेल्थ कॉन्क्लेव-2026 की शुरुआत हुई। रांची के बीएनआर चाणक्य होटल में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना, 10-बेडेड टेली-आईसीयू, एचआरआईएस पोर्टल और झारखंड ई-हेल्थ पोर्टल का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डिजिटल हेल्थ के जरिये झारखंड अपने पैरों पर खड़ा होगा और आधुनिक तकनीक का लाभ गरीब व ग्रामीण मरीजों तक पहुंचाया जायेगा।
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि तकनीक अब केवल मोबाइल की स्क्रीन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अस्पतालों और मरीजों के इलाज में जमीन पर दिखाई देगी। उनका कहना था कि किसी गरीब व्यक्ति को केवल इसलिए बेहतर इलाज से वंचित नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह बड़े शहर या विशेषज्ञ चिकित्सक तक नहीं पहुंच सकता।
गांवों तक पहुंचेगी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा
राज्य में टेलीमेडिसिन, टेली-आईसीयू और टेली-रेडियोलॉजी के विस्तार की योजना है। इसके माध्यम से बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को दूरदराज के स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी। 10-बेडेड टेली-आईसीयू शुरू होने से गंभीर मरीजों को दूर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।
टेली-रेडियोलॉजी के जरिये दूर के स्वास्थ्य केंद्रों में हुई जांच और उसकी रिपोर्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचायी जा सकेगी। इससे मरीजों को विशेषज्ञ राय के लिए बड़े शहरों की यात्रा करने की जरूरत कम करने में मदद मिलेगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी मिलेगा डिजिटल सपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि एचआरआईएस के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जायेगा। इसमें उपस्थिति, अवकाश, अनुपस्थिति, सेवा संबंधी विवरण और भुगतान जैसी जानकारी शामिल होगी।
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत करीब 80 हजार सहिया, मेडिकल स्टाफ, नर्स और अन्य कर्मियों के प्रबंधन और काम की निगरानी के लिए भविष्य में एआई आधारित प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एआई असिस्टेंट के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को काम, समय प्रबंधन और प्राथमिकताओं से संबंधित डिजिटल सहायता देने का भी प्रयास होगा।
घर बैठे होगा पंजीकरण और डॉक्टर का अपॉइंटमेंट
मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के तहत अस्पतालों में अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) लागू की गयी है। इसके माध्यम से मरीज घर बैठे पंजीकरण, भुगतान और डॉक्टर का अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। जांच के बाद रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से मरीज तक पहुंचाने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।

एआई और रोबोटिक सर्जरी पर भी काम

डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। कॉन्क्लेव में रोबोटिक कार्डियक सर्जरी को लेकर तकनीकी प्रस्तुति भी दी गयी। स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से बीमारी की रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार में तकनीक की मदद लेने पर भी जोर दिया गया।

300 करोड़ की डिजिटल हेल्थ योजना

अपर मुख्य सचिव के अनुसार करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना शुरू की गयी थी। इसके चार प्रमुख घटक कनेक्टिविटी, एचएमआईएस, सीसीटीवी आधारित मॉनिटरिंग और डिजिटल डैशबोर्ड हैं। जिला और अनुमंडल अस्पतालों को वाई-फाई से जोड़ने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया है।
डिजिटल डैशबोर्ड से अस्पतालों में मरीजों की संख्या, बीमारियों से संबंधित आंकड़ों और अन्य स्वास्थ्य सूचनाओं की निगरानी में मदद मिलेगी। इन आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की योजना और बीमारी की रोकथाम की रणनीति तैयार की जा सकेगी।

मेडिकल शिक्षा और आधुनिक इलाज पर भी जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में एमबीबीएस सीटों में वृद्धि हुई है और पीजी सीटों के विस्तार की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर झारखंड में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जा रहा है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी, चिकित्सक, विभिन्न जिलों के सिविल सर्जन, तकनीकी विशेषज्ञ और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

Related Articles

Leave a Comment