
Ranchi : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए सोमवार की रात बड़ी राहत लेकर आई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में आंदोलित छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगों को सरकार ने मान लिया। जेपीएससी के साथ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।
सरकार के फैसले के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी तथा विधायक जयराम महतो आधी रात के बाद रांची सदर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के आईसीयू-एचडीयू वार्ड में इलाजरत अनशनकारियों देवेंद्र नाथ महतो, हबीबा और राहुल क्रांतिकारी को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
15 दिन की भूख हड़ताल के बाद आईसीयू में भर्ती हैं हबीबा
बोकारो के कसमार की रहने वाली हबीबा पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थीं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल के आईसीयू-एचडीयू वार्ड में भर्ती कराया गया है। सरकार द्वारा छात्रों की मांगें मान लिए जाने की खबर जब हबीबा ने सोशल मीडिया पर देखी तो वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
अपने भाई और आंदोलन के अन्य सहयोगियों के साथ बनाए गए वीडियो में हबीबा ने कहा कि ये दुख के नहीं, बल्कि खुशी के आंसू हैं। उन्होंने इस दौरान अपने संघर्ष और मां की कही बात को याद किया।
मां ने कहा था- लड़ाई जीतकर ही घर लौटना
हबीबा ने वीडियो में बताया कि उनकी मां ने उनसे कहा था कि इस लड़ाई को जीतकर ही घर वापस आना। उन्होंने कहा कि आमतौर पर माताएं अपनी बेटियों से ऐसा नहीं कहतीं, लेकिन उनकी मां ने उन्हें संघर्ष जारी रखने और जीत हासिल करने का हौसला दिया था।
हबीबा ने कहा कि जब सरकार ने जेपीएससी के साथ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा की, तो उन्हें लगा कि अब वह अपनी मां से किए वादे को पूरा करके ही घर लौटेंगी। उनके इस भावुक बयान ने आंदोलन से जुड़े छात्रों और युवाओं को भी भावुक कर दिया।
आंदोलन की बड़ी जीत
सरकार के फैसले के बाद अनशनकारियों का अनशन समाप्त कराया गया। छात्रों ने परीक्षा रद्द करने समेत अन्य मांगें माने जाने को आंदोलन की बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र अब भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच सहित शेष मांगों को लेकर अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।


