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Nepal Flood News : नेपाल में फंसे भारतीयों पर बोले केंद्रीय मंत्री संजय सेठ – सरकार व सेना पूरी तरह मुस्तैद

by Kanchan Kumar
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​रांची: ​नेपाल में प्रकृति के कहर से उपजे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। भारी बारिश, ग्लेशियर टूटने और भीषण बाढ़ के कारण वहां सैकड़ों लोगों की जान पर बन आई है। इस संकट के बीच नेपाल में फंसे भारतीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है।

रांची में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताया है। ​केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेपाल से मिल रहीं खबरें चिंताजनक हैं। केंद्र सरकार इस मुश्किल घड़ी में वहां फंसे हर भारतीय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार नेपाल के प्रधानमंत्री से लगातार संवाद कर रही है, ताकि बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।

​ग्लोबल वार्मिंग और भूकंप बने बड़ी वजह

आपदा के कारणों की चर्चा करते हुए संजय सेठ ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में ग्लेशियरों का पिघलना और टूटना सीधे तौर पर ग्लोबल वार्मिंग का नतीजा है। इसके साथ ही क्षेत्र में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने स्थिति को और नाजुक बना दिया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में झटके महसूस किए गए थे, जिसने मलबे और पानी के बहाव को और तेज कर दिया। इतने बड़े पैमाने पर लोगों और तीर्थयात्रियों का लापता होना बेहद पीड़ादायक है।

​संकट में सेना की त्वरित कार्रवाई

भारतीय सेना के समर्पण की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सेना सिर्फ सीमा की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देशवासियों पर संकट आते ही मदद के लिए सबसे पहले खड़ी होती है। जैसे ही नेपाल में फंसे भारतीयों की खबर आई, केंद्र सरकार और भारतीय सेना ने राहत व बचाव के लिए त्वरित कदम उठाए।

​रांची के राम प्रसाद घोष लापता, परिजनों की सांसें अटकीं

इस आपदा की आंच अब झारखंड तक पहुंच चुकी है। नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रासुवागढ़ी और काठमांडू के आसपास आई भयंकर बाढ़ के बाद से रांची के कोकर (हैदर अली रोड) निवासी 41 वर्षीय राम प्रसाद घोष लापता हैं। वे एक कंपनी के प्रोजेक्ट के सिलसिले में करीब दो महीने पहले काठमांडू गए थे और करीब 200 अन्य भारतीय कर्मचारियों के साथ एक कैंप में ठहरे हुए थे।

​परिजनों के मुताबिक, मंगलवार रात उनसे बात हुई थी और बुधवार सुबह 8:30 बजे उन्होंने एक आखिरी संदेश भेजा था। इसके बाद से उनका मोबाइल बंद है। ​कंपनी के कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जब भोटकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा, तो कैंप में अफरा-तफरी मच गई।

लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। कुछ लोगों ने बस में सवार होकर निकलने की कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि पूरी बस बह गई। कुछ लोग पहाड़ियों की तरफ भागकर जान बचाने में सफल रहे। परिजन अब राम प्रसाद के सकुशल वापस लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

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