
रांची : देश के कई हिस्सों में बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा है। झारखंड और उसके आसपास के इलाकों में हुई तेज बारिश ने कोयले की आपूर्ति रोक दी है। इससे खदानों में काम ठप पड़ा और मालगाड़ियों की आवाजाही थम गई। इसका सीधा असर देश के 57 प्रमुख बिजलीघरों पर पड़ा है। इन बिजलीघरों में अब सिर्फ चार से पांच दिनों का ही ईंधन बचा है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इन 57 थर्मल पावर प्लांटों को बेहद गंभीर यानी क्रिटिकल स्थिति में रखा गया है। इन सभी बिजलीघरों को सामान्य रूप से 57.7 मिलियन टन कोयले की जरूरत होती है। लेकिन वर्तमान में इनके पास केवल 27.1 मिलियन टन स्टॉक ही उपलब्ध है। यह इनकी कुल जरूरत का महज 47 प्रतिशत हिस्सा ही है।
खदानों के अंदर गाड़ियां चलाना कठिन
मानसून के दौरान खदानों के निचले हिस्सों में पानी भर जाता है। कोयले की परतें गीली और चिपचिपी हो जाती हैं। इस वजह से खदानों के अंदर गाड़ियां चलाना कठिन हो जाता है। दूसरी तरफ, उद्योगों और घरों में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है। गर्मी और उमस के कारण बिजली की मांग तेज हुई। मांग और आपूर्ति के बीच का यह अंतर संकट को और बड़ा बना रहा है।
उत्तरी राज्यों पर बढ़ा बड़ा दबाव, राहत के लिए रेल ट्रैक और खदानों में तेजी
इस कोयला संकट का सबसे बड़ा असर उत्तरी भारत के राज्यों में देखा जा रहा है। राजस्थान के सभी सात पावर प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश के भी सात बिजलीघरों में कोयले की भारी किल्लत है। इनमें से चार प्लांट अपनी जरूरत के लिए झारखंड की खदानों पर निर्भर हैं।
पंजाब के निजी पावर प्लांटों में भी स्थिति बेहद नाजुक है। राजपुरा और तलवंडी साबो जैसे बड़े बिजलीघरों में सिर्फ पांच से छह दिनों का ईंधन शेष बचा है। इन दोनों पावर प्लांटों की कुल क्षमता करीब 3,380 मेगावाट है। आपूर्ति बाधित होने से यहाँ बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
बढ़ा दी गई है कोयला निकालने की रफ्तार
कोयला मंत्रालय ने सभी उत्पादक कंपनियों को आपूर्ति तेज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। बिजलीघरों को अब हर दिन करीब 1.7 मिलियन टन कोयला भेजा जा रहा है। कोल इंडिया ने बिजलीघरों को समझौते की तय सीमा से ज्यादा कोयला उठाने की छूट भी दे दी है। बारिश रुकते ही खदानों से कोयला निकालने की रफ्तार बढ़ा दी गई है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह के अनुसार, अगस्त के अंत में हुई भारी बारिश से मालगाड़ी के रैकों की संख्या घट गई थी। पहले रोजाना केवल 25 रैक कोयला ही भेजा जा पा रहा था। अब इसमें सुधार हुआ है और रोजाना 40 रैक भेजे जा रहे हैं। इसे जल्द ही बढ़ाकर 46 रैक करने का लक्ष्य है।
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