
रांची : झारखंड में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत अब खेती के चरम मौसम में काम नहीं कराया जाएगा। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जी राम जी के तहत कुल 60 दिनों का कृषि अवकाश निर्धारित किया है। इस अवधि में किसी भी ग्राम पंचायत में योजना के तहत नया काम शुरू करने, उसे स्वीकृत करने या क्रियान्वित करने पर रोक रहेगी।
ग्रामीण विकास विभाग ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा चिन्हित कृषि के चरम मौसम के आधार पर यह व्यवस्था लागू की है। झारखंड में 80 प्रतिशत से अधिक कृषि गतिविधियां धान उत्पादन पर निर्भर हैं। धान की नर्सरी तैयार करने, रोपनी, निकाई-गुड़ाई, कटाई और ओसाई के साथ रबी और गरमा फसल की तैयारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर कृषि कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में रोजगार योजना और कृषि कार्यों के बीच श्रम उपलब्धता को संतुलित करने के लिए कृषि अवकाश तय किया गया है।
चार चरणों में रहेगा 60 दिन का कृषि अवकाश
अधिसूचना के अनुसार, 60 दिनों के कृषि अवकाश को चार चरणों में 15-15 दिन के रूप में निर्धारित किया गया है। पहला कृषि अवकाश धान की रोपाई और खरीफ फसल की खेती के दौरान, दूसरा खर-पतवार निकौनी और खाद के प्रयोग के समय, तीसरा धान की कटाई एवं रबी फसल की खेती के दौरान तथा चौथा धान की ओसाई एवं गरमा फसल की तैयारी के समय रहेगा।
इन अवधियों में योजना से संबंधित कोई भी काम शुरू, स्वीकृत अथवा क्रियान्वित नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, मानसून में देरी, सुखाड़, प्राकृतिक आपदा जैसी स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए सक्षम स्तर पर कृषि अवकाश की अवधि में बदलाव किया जा सकेगा। विशेष एवं असाधारण परिस्थितियों में राज्य सरकार की अनुशंसा पर केंद्र सरकार निर्धारित अवधि में छूट भी दे सकती है।
पंचायतों की श्रम मांग भी इसी हिसाब से बनेगी
विभाग ने उपायुक्त-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक समेत सभी कार्यान्वयन प्राधिकारियों को कृषि अवकाश के दौरान योजना के काम नहीं कराने का निर्देश दिया है। विकसित ग्राम पंचायत योजना और वार्षिक श्रम मांग तैयार करते समय भी यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना के सभी काम कृषि अवकाश के बाहर ही प्रस्तावित किए जाएं।
अधिसूचना के मुताबिक यह व्यवस्था विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 और योजना के उद्देश्यों के तहत बाध्यकारी होगी। किसी भी असंगति की स्थिति में अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे।
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