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19 साल बाद शुरू होने वाला है सावन का मलमास, जाने क्या है इसका महत्व और किस तिथि से शुरू होगा यह पवित्र महीना

by Rakesh Pandey
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जमशेदपुर : सावन का महीना शुरू हो चुका है। क्या आप जानते हैं कि इस बार के सावन में क्या खास है। दरअसल, इस बार एक महीना अधिक सावन रहेगा। क्योंकि इसबार एक महीने का मलमास शुरू हो रहा है। नाम को लेकर किसी तरह के भ्रम में नहीं पड़ें, मलमास को अधिकमास भी कहा जाता है।

इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

विष्णु के साथ करें भगवान शिव की पूजा 

सावन में मलमास (अधिकमास) पड़ने से इस बार भक्तों को भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विशेष अवसर हैं। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मलमासा, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास जो भी कह लें, हर तीन साल पर आता है। हर तीन साल बाद यानि चौथे साल मलमास लगता है। मलमास लगने के पीछे के ज्योतिषीय गणित के अनुसार साल में सौर वर्ष 365 दिन 6 घंटे और 99 सेकेंड का होता है।

वहीं साल में चंद्र वर्ष में 354 दिन और 8 घंटे होते है। दोनों वर्षमानो में अंतर किया जाए तो प्रति वर्ष 10 दिन 28 घंटे होते है। ऐसे में तीन वर्षों के मान का अंतर निकालने पर एक मास अतिरिक्त होता है। इसी प्रकार हर तीन वर्ष के बाद मलमास पड़ता है।एक मलमास से अगले मलमास की पुनरावृति 28 माह से लेकर 36 माह तक की होती है।

इस दिन शुरू होगा सावन का मलमास 

इस बार मलमास भगवान शिव के पावन माह सावन में पड़ रहा है। मलमास की शुरुआत 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन माह की शुरुआत 4 जुलाई से हो चुकी है। यह सावन माह 31 अगस्त को खत्म होगा। कहने का अर्थ यह कि इस बार सावन पूरे दो महीने तक चलेगा। जिसमें कुल 8 सोमवार होंगे। ऐसा संयोग 19 वर्ष के बाद आया है।

सावन के मलमास में पूजा 

सावन के मलमास में शिव की पूजा से बहुत लाभ होता है। इसका विशेष महत्व भी है। इस माह में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पूजा करने से विशेष लाभ होता है। सावन शुक्रवारी व्रत भी किया जाता है और माता सती की पूजा की जाती है। इस माह में अधिकमास व्रत भी किया जाता है।

इस मलमास शिव की पूजा करने से होंगे विशेष लाभ 

शिवलिंग की पूजा- सावन के मलमास में शिवलिंग पूजा विशेष महत्वपूर्ण होती है। शिवलिंग को साफ कर जल से स्नान कराएं। धूप, दीप, फूल, अक्षत और बेलपत्र चढ़ाएं। शिवलिंग के आगे धूप,दीप और अर्चना कर सकते हैं। इसके साथ ही सावन के मलमास में रुद्राभिषेक का आयोजन कर सकते हैं। इसमें शिवलिंग पर गंगा जलए धूप, दीप, बेल पत्र, फूल आदि चढ़ाएं जो उनकी पूजा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।

जप और ध्यान 

सावन के मलमास में शिवजी की पूजा के लिए ॐ नमः शिवाय मन्त्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आप एक माला (108 मन्त्रों की) के साथ इस मन्त्र का जाप कर सकते हैं और अपने मन को शिव के ध्यान में स्थिर कर सकते हैं।

सोमवार व्रत-सावन के मलमास में सोमवार का विशेष महत्व होता है। सोमवार व्रत के दौरान आप नियमित रूप से शिवलिंग की पूजा करें, मन्त्र जप करें।

भगवान विष्णु को क्यों प्रिय है मलमास 

शास्त्रों के अनुसार मलमास का कोई स्वामी नहीं होने के कारण देवता और मनुष्यों ने इसे स्वीकार नहीं किया। अपनी निंदा से मलमास को बहुत दुख पहुंचा और वह भगवान विष्णु के शरण में गया। अपनी सारी व्यथा सुनाई। भगवान विष्णु उसे अपने साथ पृथ्वीलोक पर भगवान कृष्ण के पास ले गए।

अधिकमास ने वहीं व्यथा फिर से सुनाई। इसके बाद कृष्ण ने वचन देते हुए कहा कि आज से वे अधिकमास के स्वामी है। इस माह में पूजा-पाठ करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा। उन्होंने कहा इस माह को अब लोग पुरुषोत्तम माह से जानेंगे।

कौन से शुभ कार्य नहीं करने चाहिए 

मलमास को हिन्दू धर्म में अधिक महीना माना जाता है। इस महीने में कुछ शुभ कार्यों का निषेध किया जाता है।
विवाह कार्य- मलमास में विवाह का आयोजन नहीं किया जाता है। यह अवधि विवाह समारोहों के लिए शुभ नहीं मानी जाती है।

गृह प्रवेश- मलमास में नए घर में गृह प्रवेश का आयोजन भी नहीं किया जाता। लोग इस समय में घर में नए समान लाने या घर का पुराना सामान बदलने से बचते हैं।

मुंडन, विदाई मलमास में बालों का मुंडन और विदाई आदि शुभ संस्कार नहीं किए जाते हैं। इन कार्यों को भी मलमास में शुभ नहीं माना जाता है।

श्राद्ध मलमास में पितृ पक्ष भी होता हैए जिसमें आप अपने पूर्वजों की प्रतिष्ठा करते हैं। श्राद्ध का आयोजन भी मलमास में नहीं किया जाता है। इस समय में पितृ तर्पण नहीं किया जाता है।

विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ लाभकारी 

मलमास में विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ बहुत लाभकारी होता है। इस स्तोत्र में भगवान विष्णु का 1000 नामों का उल्लेख होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजा कर सकते है। दिव्य नाम संकीर्तन भी लाभकारी होता है।

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