Gross Domestic Product: आपने अक्सर न्यूज़ टीवी चैनल या फिर अखबार में इंडिया की GDP या कुल Economy के बारे में जरूर सुना होगा। क्या आप जानते हैं कि जीडीपी आखिर है क्या? ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) एक महत्वपूर्ण अर्थशास्त्रिक माप है जो किसी देश की आर्थिक स्थिति को मापने के लिए उपयोग होता है। जीडीपी किसी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण सूचकांक (index) है। यह एक वर्ष के दौरान देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है। जीडीपी को आमतौर पर एक देश की आर्थिक समृद्धि और विकास को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
कैसे निर्धारित होती है जीडीपी?
जीडीपी की गणना एक देश की आर्थिक गतिविधियों का मूल्य मापने की प्रक्रिया है जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानक बुक सिस्टम ऑफ नेशनल एकाउंट्स (1993) का उपयोग होता है। इसे SNA93 भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में, देश में उत्पन्न होने वाले सभी वस्त्र, सेवाएं और निवेश का मूल्य मापा जाता है, जिन्हें वर्तमान मूल्यों के साथ जोड़ा जाता है। इसके अलावा, देश के नेट निर्यात-आयात (निर्यात–आयात) का अंतर मूल्य भी जीडीपी में शामिल किया जाता है।
कौन तय करता है GDP?
जीडीपी को नापने की जिम्मेदारी सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के तहत आने वाले सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस यानी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की है। यह ऑफिस ही पूरे देश से आंकड़े इकट्ठा करता है और उनकी कैलकुलेशन कर जीडीपी का आंकड़ा जारी करता है।
नॉमिनल जीडीपी और रियल जीडीपी
GDP (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट) को दो तरह से मापा जाता है – नॉमिनल जीडीपी और रियल जीडीपी। इन दोनों मापों में अंतर होता है, और यह दोनों अर्थशास्त्रिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हैं। नॉमिनल जीडीपी एक देश की आर्थिक गतिविधियों का कुल मूल्य होता है, जिसमें मूल्यों का वर्तमान स्तर शामिल होता है। यानी, इसमें वस्त्र, सेवाएं, और निवेश के मूल्य शामिल होते हैं जैसे कि वे वर्तमान समय में हैं, बिना किसी मूल्य सुधार के। नॉमिनल जीडीपी अक्सर आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत देता है, लेकिन यह मूल्य वृद्धि के पीछे की असली आर्थिक वृद्धि को नहीं दर्शाता।
रियल जीडीपी भी एक देश की आर्थिक गतिविधियों का कुल मूल्य होता है, लेकिन इसमें मूल्यों का वर्तमान स्तर की बजाय एक आधार साल के मूल्य स्तर का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य मूल्य सुधार को निकालकर आर्थिक गतिविधियों की असली वृद्धि को मापना है। रियल जीडीपी की गणना जीडीपी नॉमिनल जीडीपी / डिफ्लेटर के रूप में गणना की जाती है। जहां डिफ्लेटर मूल्य स्तर को प्रतिष्ठापित करता है। इससे हम वस्त्र, सेवाएं और निवेश के मूल्यों की प्रतिष्ठा में वृद्धि को देख सकते हैं, अन्यत्र मूल्य सुधार के प्रभाव को हटा देते हैं।
जीडीपी से आम लोगों पर कैसे पड़ता है असर?
जीडीपी के आंकड़ों का आम लोगों पर भी असर पड़ता है। अगर जीडीपी के आंकड़े लगातार सुस्त होते हैं तो ये देश के लिए खतरे की घंटी मानी जाती है। जीडीपी कम होने की वजह से लोगों की औसत आय कम हो जाती है और लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। इसके अलावा नई नौकरियां पैदा होने की रफ्तार भी सुस्त पड़ जाती है। आर्थिक सुस्ती की वजह से छंटनी की आशंका बढ़ जाती है। वहीं लोगों का बचत और निवेश भी कम हो जाता है।
भारत की GDP कितनी है?
देश की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2023) में 7.8 फीसदी रही है, यह पिछली 4 तिमाहियों यानी एक साल सबसे अधिक है. इससे पहले मार्च-2023 तिमाही में GDP ग्रोथ 6.1 फीसदी रही थी, जबकि पिछले साल जून तिमाही में लो बेस के चलते GDP ग्रोथ रेट 13.1 फीसदी दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष (2023-2024) की अप्रैल-जून तिमाही में तमाम रेटिंग एजेंसियों ने देश की जीडीपी ग्रोथ को 7.8-8.5 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था. RBI ने अप्रैल-जून, 2023 की तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
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