Ranchi : झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में लगभग 23 महीने बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार जेल से रिहा कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद बुधवार को उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई।
आलमगीर आलम की जमानतदार उनकी पत्नी निशात आलम बनीं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही उन्हें और सह आरोपी संजीव लाल को राहत दे दी थी, लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से मंगलवार को रिहाई संभव नहीं हो सकी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी समय पर आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाई थी। नियमों के अनुसार आदेश अपलोड होने के बाद ही निचली अदालत में बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसी कारण उनकी रिहाई में एक दिन की देरी हुई।
आलमगीर आलम और संजीव लाल पिछले 23 महीनों से न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले दोनों ने निचली अदालत और झारखंड हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन राहत नहीं मिलने के बाद 25 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब शीर्ष अदालत से जमानत मिलने के बाद दोनों जेल से बाहर आ गए हैं।

