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RANCHI NEWS: हाईकोर्ट ने पुलिस व जेल हिरासत में मौत व रेप मामलों में न्यायिक जांच को किया अनिवार्य

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने दिया आदेश

by Vivek Sharma
झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस व जेल हिरासत में मौत और रेप मामलों में न्यायिक जांच अनिवार्य की, सरकार को SOP बनाने का निर्देश।
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RANCHI: झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिस हिरासत, जेल में मौत और रेप की घटनाओं में न्यायिक जांच को अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने आदेश दिया कि अब ऐसे सभी मामलों में ज्यूडिशियल इंक्वायरी अनिवार्य होगी। पहले इन मामलों की जांच एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट से कराई जाती थी। कोर्ट ने अपने आदेश में झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) को जेल, पुलिस कस्टडी में मौत या रेप के मामले में नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन नई दिल्ली की गाइडलाइन के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी ) तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि ऐसे मौत और रेप के मामलों की जांच का कार्यान्वयन सही ढंग से हो।

खंडपीठ ने सरकार की ओर से दिए गए 250 ऐसे मामले जिनमें ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं हुई है, उसमें जिला जज कारण बताते हुए उच्च न्यायालय को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने सरकार को कई अन्य दिशा निर्देश भी दिए हैं। पूर्व में कोर्ट ने प्रार्थी एवं राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद सुनवाई पूरी करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब अंसारी ने पक्ष रखा था। उनकी ओर से कोर्ट के समक्ष लिखित बहस प्रस्तुत किया गया था। साथ ही उच्चतम न्यायालय के जजमेंट,राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अलावा बीएनएसएस का 196 सब सेक्शन (2) को भी कोर्ट को समर्पित समर्पित किया गया था।

गृह सचिव ने शपथ पत्र किया था दाखिल

उल्लेखनीय है कि मामले में पूर्व में गृह सचिव ने एक शपथ पत्र दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि पुलिस कस्टडी एवं जेल कस्टडी में वर्ष 2018 से 2025 के बीच करीब 500 मौत हुई है, इनमें से करीब आधे में ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं हुई है। इससे पहले कोर्ट ने गृह सचिव से स्पष्ट रूप से यह बताने को कहा था कि राज्य में हुई सभी हिरासत में मौत की घटनाओं में न्यायिक जांच कराई गई है या नहीं।

कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि शपथ पत्र में यह जानकारी दी जाए कि न्यायिक जांच के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया या नहीं। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी मोहम्मद मुमताज अंसारी ने राज्य में जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामले की जांच करने का आदेश देने का आग्रह कोर्ट से किया है।

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