- सारंडा में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन कगार के बढ़ते दबाव के बाद पत्नी के साथ नरहरी उर्फ विश्वनाथ ने किया सरेंडर, नक्सली संगठन के तकनीकी और रणनीतिक ढांचे को लगा बड़ा झटका
चाईबासा : माओवादी संगठन के टेक्निकल विंग के हेड और सेंट्रल कमेटी सदस्य पसूनूरी नरहरि उर्फ विश्वनाथ उर्फ संतोष ने अपनी पत्नी पूनम उर्फ शोभा के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। विश्वनाथ प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था। वह लंबे अरसे से सारंडा में सक्रिय था। विश्वनाथ झारखंड के सारंडा के जंगलों में एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा के साथ सुरक्षा घेरे में मौजूद आखिरी सबसे प्रमुख कमांडर था। वह तेलंगाना के हनमाकोंडा जिले के काजीपेट मंडल के सोमीदी गांव का मूल निवासी है और पिछले लगभग 40-45 वर्षों से भूमिगत जीवन जी रहा था। विश्वनाथ पर प्रशासन द्वारा 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण का कारण सारंडा में कड़ा पहरा
झारखंड पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों द्वारा सारंडा वन्य क्षेत्र में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत बढ़ते दबाव के कारण उसने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। उसने तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। विश्वनाथ के आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के तकनीकी और रणनीतिक ढांचे के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस आत्मसमर्पण के बाद तेलंगाना मूल के केवल गिने-चुने सक्रिय माओवादी नेताही जंगलों में बचे हैं।

