रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस बल में दारोगा (सब इंस्पेक्टर) से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली प्रोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।
यह मामला वर्ष 2017 में हुई दारोगा बहाली की दो अलग-अलग प्रक्रियाओं और उनसे जुड़ी वरीयता सूची को लेकर उठे विवाद से संबंधित है। इस संबंध में उत्तम तिवारी एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2017 में दारोगा नियुक्ति के लिए पहले सीधी बहाली का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से विभागीय कर्मियों का चयन किया गया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रोन्नति के लिए तैयार की गई वरीयता सूची में सीमित विभागीय परीक्षा से चयनित अधिकारियों को सीधी नियुक्ति वाले अधिकारियों से ऊपर स्थान दिया गया है, जबकि यह नियमों और नियुक्ति क्रम के विपरीत है। उन्होंने अदालत से इस विसंगति को दूर करने और प्रोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर किसी भी प्रकार की प्रोन्नति नहीं करने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि वरीयता सूची तैयार करते समय किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
इस फैसले का असर राज्य पुलिस विभाग की लंबित प्रोन्नति प्रक्रिया पर पड़ सकता है। फिलहाल कई दारोगा इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।
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