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Amrut 2.0 : अमृत 2.0 में बदलाव : रांची के कई तालाबों और पार्कों के विकास का रास्ता साफ, सीवरेज परियोजना से बची राशि होगी खर्च

by Nikhil Kumar
Jharkhand Project Bhawan
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रांची : झारखंड सरकार ने अमृत 2.0 मिशन के तहत रांची शहर में सीवरेज परियोजना और जलाशयों के सौंदर्यीकरण से जुड़ी योजनाओं में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। रांची सीवरेज प्रबंधन परियोजना (फेज-2, जोन-2) की लागत में कमी और कुछ अन्य योजनाओं के पुनर्गठन के बाद बची राशि से राजधानी के कई तालाबों के पुनर्जीवन और पार्क विकास की नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
नगर विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले प्रस्तावित 10 जलाशय एवं पार्क परियोजनाओं की जगह अब 8 नई योजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव है। इनमें रांची के कई प्रमुख तालाबों के जीर्णोद्धार और पार्क निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।

रांची में जिन प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है, उनमें वार्ड संख्या-1 स्थित चांदवे तालाब का पुनर्जीवन, जगन्नाथपुर न्यू कॉलोनी क्षेत्र के तालाब का विकास, वार्ड संख्या-37 के तालाब का सौंदर्यीकरण, धुर्वा बस स्टैंड के पास स्थित तालाब का पुनर्जीवन तथा करमगढ़ा स्थित बांधगढ़ी तालाब का विकास शामिल है। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ शहरवासियों को बेहतर सार्वजनिक स्थल भी उपलब्ध होंगे।

रांची सीवरेज मैनेजमेंट परियोजना (फेज-2) के लिए एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से 700 करोड़ रुपये के ऋण सहित कुल 880 करोड़ रुपये की परियोजना लागत तय की गई थी। परियोजना लागत में कमी आने के कारण बची राशि को जलाशयों और पार्क विकास कार्यों में लगाने का निर्णय लिया गया है।

एसएनए स्पर्श प्रणाली से आई वित्तीय चुनौती

बैठक में यह भी सामने आया कि अमृत 2.0 की योजना बनाते समय एसएनए स्पर्श (जस्ट इन टाइम पेमेंट सिस्टम) लागू नहीं था। उस समय परियोजनाओं में केंद्र, राज्य, नगर निकाय, अतिरिक्त राज्य अंश तथा एडीबी /विश्व बैंक ऋण जैसे कई स्रोतों से धनराशि की व्यवस्था थी।
बाद में एसएनए स्पर्श लागू होने के बाद भुगतान व्यवस्था केवल केंद्र और राज्य हिस्से तक सीमित हो गई। इसके कारण नगर निकाय, अतिरिक्त राज्य अंश और ऋण मद की राशि का उपयोग नहीं हो पाया और कई परियोजनाओं में केंद्र की राशि भी पूरी तरह खर्च नहीं हो सकी।
इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार अब राज्य के विभिन्न हिस्सों—नगर निकाय, अतिरिक्त राज्य अंश और ऋण मद—को एकीकृत कर एक ही “राज्य अंश” के रूप में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इससे रांची समेत अन्य शहरों की जलापूर्ति, सीवरेज और शहरी विकास योजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

रांची को क्या होगा फायदा

रांची में सीवरेज नेटवर्क विस्तार के साथ तालाबों के संरक्षण और पार्क विकास पर एक साथ काम होने से शहर की पर्यावरणीय स्थिति बेहतर होगी। वर्षों से उपेक्षित जलाशयों का पुनर्जीवन होने से भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी, वहीं पार्क विकसित होने से लोगों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं मिलेंगी। शहरी विकास विभाग का मानना है कि अमृत 2.0 के वित्तीय ढांचे में बदलाव से रांची की कई लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी।

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