
New Delhi/Patna: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट समिति की बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अब आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2025 के साथ- हीदेशव्यापी जातीय जनगणना भी कराई जाएगी। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस फैसले को “भविष्य की पीढ़ियों के उत्थान” की दिशा में उठाया गया एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया है।
विजय सिन्हा ने बताया बिहार के प्रयासों की जीत
पटना में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हित में जो निर्णय लिया है, वही निर्णय बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी के नेतृत्व में पहले ही लिया जा चुका था। यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए लिया गया है।” इस दौरान विजय सिन्हा ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब राजद सत्ता में थी, तब उन्होंने जातीय जनगणना को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सिन्हा ने कहा, “तेजस्वी यादव के पास 15 वर्षों तक सत्ता में रहने का मौका था, लेकिन उन्होंने इस दिशा में कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया। उनके कथनों और कार्यों में हमेशा विरोधाभास रहा है।”
सम्राट चौधरी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ही वह नेता हैं जो समाज के सभी वर्गों के सपनों को साकार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। चौधरी ने कहा, “चाहे सोनिया गांधी हों, राहुल गांधी हों या लालू प्रसाद यादव, हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी ने सबके सपनों को पूरा करने का काम किया है।”
दिलीप जायसवाल का विपक्ष पर तंज
भाजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा कि INDIA गठबंधन के नेता धीरे-धीरे प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की यह दूरदर्शी योजना थी कि जब देश में जनगणना होगी, तभी जातीय जनगणना भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में सभी जातियों को उनका उचित हक मिल सके। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री के किसी निर्णय पर पूरा विपक्ष खुशी से पटाखे फोड़ रहा है।”
जातीय जनगणना पर केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट
संविधान के अनुच्छेद 246 के अनुसार, जनगणना एक संघीय विषय है, जो सातवीं अनुसूची की संघ सूची के आइटम 69 में दर्ज है। कैबिनेट समिति के निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “कुछ राज्यों ने अपनी तरफ से जातीय जनगणना करवाई है, लेकिन उनकी पारदर्शिता और मंशा को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। कई बार यह सर्वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर किए गए हैं, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।” उन्होंने आगे कहा, “सामाजिक तानेबाने को राजनीतिक दबाव से बचाने और एक पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि जातीय गणना अब मुख्य जनगणना के अभिन्न हिस्से के रूप में की जाएगी।”
पहले से जातीय जनगणना कराने वाले राज्य
गौरतलब है कि बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य पहले ही अपने स्तर पर जातीय जनगणना करा चुके हैं। तेलंगाना में तो पिछड़ा वर्ग के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण भी लागू है। अब केंद्र सरकार द्वारा इस प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने से पूरे देश में सामाजिक न्याय और सभी वर्गों के उचित प्रतिनिधित्व को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह फैसला निश्चित रूप से भारतीय राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।

