चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा को-ऑपरेटिव बैंक में खाताधारकों की राशि की कथित अवैध निकासी को लेकर दायर दो अलग-अलग मामलों में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ितों को अब कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
बैंक से शिकायत के बावजूद नहीं हुई थी कार्रवाई
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने बैंक प्रबंधन को कई बार शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद थाना में भी प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। करीब दो से तीन साल तक भटकने के बाद न्यायालय के हस्तक्षेप पर दोनों मामलों में केस दर्ज हुआ।
मुआवजा राशि निकालने से जुड़ा है पहला मामला
पहला मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के इलीगढ़ा गांव के निवासी अमृत लाल कालुंडिया से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवंगत मानसिंह कालुंडिया की स्वर्णरेखा परियोजना में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की राशि बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से फर्जी तरीके से निकाल ली गई। शिकायत में कहा गया है कि इलीगढ़ा गांव के दिनेश कालुंडिया, मिरेन कालुंडिया और सुजीत कालुंडिया ने अपनी फोटो लगाकर और नाम बदलकर खुद को मानसिंह का पुत्र बताते हुए फर्जी खाता खुलवाया और पैसे निकाल लिए। विरोध करने पर मारपीट और अपमानित करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
पेंशन की राशि निकालने की है दूसरी शिकायत
दूसरा मामला चाईबासा के पास मटकमहातु गांव की निवासी जेमा कुई से संबंधित है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते से जमा पूंजी और वृद्धावस्था पेंशन की रकम उनकी जानकारी के बिना निकाल ली गई। शिकायत में बताया गया कि करीब 45 हजार रुपये की अवैध निकासी के बाद सी. बोदरा नामक व्यक्ति ने खाते में 7 हजार रुपये जमा किए। पीड़िता का कहना है कि मामला दबाने के लिए यह राशि जमा कराई गई।
दो साल तक लगातार निकाली जाती रही रकम
शिकायत के अनुसार जून 2022 से नवंबर 2024 के बीच लगातार पेंशन की रकम निकाली जाती रही। शिकायत में उस दौरान पदस्थ शाखा प्रबंधक राबिया भगत, कैशियर और अन्य बैंक कर्मियों पर भी मिलीभगत का आरोप है। सदर थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर दोनों मामलों में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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