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Deoghar Kanwar Yatra : देवघर पहुंचने से पहले इस प्राचीन शिव मंदिर में माथा टेकते हैं लाखों कांवरिया, जानिए क्या है इसकी खास मान्यता

by Rakesh Pandey
Deoghar Kanwar Yatra
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देवघर/ पूर्णिया : सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, भक्ति और आस्था का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। सावन में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु कांवर यात्रा पर निकलकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस धार्मिक यात्रा के दौरान कई ऐसे पड़ाव आते हैं, जिनका विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इन्हीं प्रमुख स्थलों में बिहार के पूर्णिया जिले में स्थित श्री श्री 108 सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर भी शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में कांवरिया रुककर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

देवघर यात्रा मार्ग का प्रमुख आस्था केंद्र बना सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर

पूर्णिया जिले के हरदा बाजार पुल के समीप कारी कोसी नदी के तट पर स्थित श्री श्री 108 सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के किनारे स्थित होने के कारण यह मंदिर देवघर जाने वाले कांवरियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बन चुका है। सावन के दौरान यहां सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहता है।

चंदू सौदागर से जुड़ी है इस प्राचीन शिव मंदिर की मान्यता

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस प्राचीन मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध व्यापारी चंदू सौदागर ने कराया था। कारी कोसी नदी के किनारे स्थित होने के कारण मंदिर का प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण इसे धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विशेष बनाता है।

मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, राधा-कृष्ण, हनुमान जी तथा मां दुर्गा सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसी कारण श्रद्धालु एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

असम, बंगाल, नेपाल समेत कई राज्यों से आने वाले कांवरियों का प्रमुख पड़ाव

राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर स्थित होने के कारण असम, पश्चिम बंगाल, नेपाल, ओडिशा, सिलीगुड़ी, फरक्का और आसपास के अनेक क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु देवघर पहुंचने से पहले इस मंदिर में अवश्य रुकते हैं। यहां भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से यात्रा सफल और मंगलमय होती है।

42 दिनों तक चलेगा नि:शुल्क सेवा शिविर और महाभंडारा

सावन के अवसर पर मंदिर परिसर में 42 दिनों के लिए नि:शुल्क सेवा शिविर और महाभंडारे का आयोजन किया गया है। इस दौरान कांवरियों के लिए भोजन, प्रसाद, पेयजल, विश्राम और रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूरे सावन माह श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहते हैं ताकि लंबी यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सेवा शिविर के शुभारंभ के अवसर पर डिप्टी मेयर पल्लवी गुप्ता सहित स्थानीय समिति के कई सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

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