
चाईबासा : गुजरात के राजकोट में बंधक बनकर रह रहे कोल्हान (झारखंड) के चार प्रवासी मजदूरों के लिए आखिरकार राहत की सुबह आई है। ‘द फोटोन न्यूज’ पर खबर प्रसारित होने के बाद, चक्रधरपुर नगर परिषद के अध्यक्ष सन्नी उरांव और जाने-माने समाजसेवी विनोद भागेरिया ने त्वरित कदम उठाते हुए इन चारों श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर दी है। सभी मजदूर इस समय ट्रेन से अपने घर लौट रहे हैं।
भुखमरी की कगार पर थे मजदूर, नगर पार्षद अध्यक्ष
सन्नी उरांव एवं समाजसेवी विनोद भागेरिया ने लिया संज्ञान
राजकोट रेलवे स्टेशन पर असहाय स्थिति में बैठे इन मजदूरों की खबर जैसे ही सामने आई, सन्नी उरांव ने बिना वक्त गंवाए सीधे उनसे फोन पर संपर्क साधा। उन्होंने तत्काल चारों मजदूरों के लिए चक्रधरपुर तक की ट्रेन के टिकट का इंतजाम कराया।
टिकट मिलने के बाद यात्रा के दौरान उनके भोजन और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी ‘भागेरिया फाउंडेशन’ के संस्थापक और समाजसेवी विनोद भागेरिया ने उठाई। उन्होंने मजदूरों को नकद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे उनकी यात्रा सुगम हो सकी।
बंधुआ मजदूर बनाकर रखने और मारपीट का आरोप
घर लौट रहे श्रमिकों में कार्तिक लोहार (चक्रधरपुर), राधे लोहार (गोइलकेरा) सहित लक्ष्मण पुरती और गोविंदा पुरती (हाटगम्हरिया) शामिल हैं। उन्होंने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे पिछले एक साल से राजकोट की एक कंपनी में काम कर रहे थे। हमें महीनों से वेतन नहीं दिया गया और बंधुआ मजदूरों की तरह खटाया जा रहा था। विरोध करने पर हमारे साथ मारपीट की जाती थी और परिसर से बाहर जाने पर पाबंदी थी। हम जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर वहां से भागे और राजकोट रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन हमारे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है।
अन्य मजदूरों को बचाने और कार्रवाई की मांग
समय पर मिली इस मदद के लिए चारों श्रमिकों ने सन्नी उरांव और विनोद भागेरिया का हाथ जोड़कर आभार जताया है। घर लौट रहे मजदूरों ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उनके कई साथी अब भी उस कंपनी में बंधक हैं और नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
पीड़ितों ने झारखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि राजकोट में फंसे बाकी मजदूरों को भी जल्द से जल्द रेस्क्यू किया जाए और दोषी कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एजेंसी पर भी हो सकती कार्रवाई
हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि इन मजदूरों को कौन राजकोट ले गया था। नियम के मुताबिक, उस एजेंसी या व्यक्ति पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सरकारी प्रावधान के अनुसार, दूसरे राज्य में मजदूरी या नौकरी पर जाने से पहले स्थानीय श्रम विभाग को सूचित करना आवश्यक है।

