
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले की जांच सीआईडी कर रही है। जांच अधिकारियों को कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं।
इस महाघोटाले का मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी है। वह परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर था।
टीडीपीएल से जुड़े मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, पिता- सुखदेव तिवारी ने स्वयं टीडीपीएल द्वारा वर्ष 2024 में आयोजित एफआरओ और एसीएफ की पीटी परीक्षाएं दी थीं। यह सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता और ईमानदारी के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।
आरोपी अभय तिवारी परीक्षा प्रणाली में हेरफेर करने का दावा करता था। वह अभ्यर्थियों को पास कराने की पूरी गारंटी देता था। इसके बदले वह भारी-भरकम रकम वसूलता था।
प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख रुपये मांगे जाते थे। वहीं अंतिम चयन कराने के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक का सौदा होता था। वह अपने और अपने परिवार के चयन का हवाला देकर लोगों का विश्वास जीतता था।
सीआईडी की जांच अभय की पत्नी, भाई और रिश्तेदारों तक पहुंच चुकी है। आरोप है कि अभय ने अपने पावर का इस्तेमाल कर करीबियों को नौकरियां दिलवाईं। जांच एजेंसी अब उनके परीक्षा परिणामों और रोल नंबरों की गहराई से पड़ताल कर रही है।
500 से अधिक ओएमआर शीट में गड़बड़ी
जांच में फर्जीवाड़े के बेहद संगीन तरीके सामने आए हैं। एफआरओ और एसीएफ परीक्षाओं की 500 से अधिक ओएमआर शीट में फेरबदल पाया गया है। एफआरओ परीक्षा की 350 से ज्यादा और एसीएफ की 150 से अधिक ओएमआर शीट शक के घेरे में हैं।
केवल कागजी ओएमआर शीट ही नहीं बदली गईं। आरोपियों ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और मुख्य सर्वर में भी छेड़छाड़ की। आरोपियों का दुस्साहस यहीं खत्म नहीं हुआ। असली उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित स्टोर से बाहर निकाला जाता था। पैसे लेकर उन्हें दोबारा लिखवाया या बदला जाता था। अभ्यर्थियों पर लगाम कसने के लिए उनसे असली प्रमाणपत्र जमा कराए जाते थे।
इसके अलावा खाली स्टांप पेपर, कैंसिल चेक और खाली ए-4 शीट पर उनके दस्तखत लिए जाते थे। इन कागजातों का इस्तेमाल पैसे की वसूली और दबाव बनाने के लिए किया जाता था। धोखाधड़ी के इस बड़े खेल का केंद्र लखनऊ का जानकीपुरम स्थित टीडीपीएल कार्यालय था। वहां कंपनी के निदेशकों और कर्मचारियों द्वारा एक सीक्रेट सेल चलाया जा रहा था।
अभय तिवारी का नाम जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले में भी पहले से दर्ज है। अब सीआईडी की जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। एजेंसी यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन से अफसर और कर्मचारी शामिल थे। ओएमआर शीट, सर्वर लॉग और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी है।

