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Hanuman Jayanti : कब है हनुमान जयंती, साल में 2 बार क्यों मनाया जाता है जन्म महोत्सव, जानिए ग्रहों का होगा बड़ा परिवर्तन

हनुमान शब्द का अर्थ भी बहुत ही गूढ़ है। "ह" शिव, "नु" पूजा और प्रशंसा, "मा" श्री लक्ष्मी और श्री विष्णु और "न" बल और वीरता का प्रतीक है।

by Rakesh Pandey
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वाराणसी: भगवान हनुमान, जिन्हें रामदूत, अंजनी-पुत्र और पवनसुत के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म महोत्सव हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रद्धेय पर्व माना जाता है। यह पर्व हर साल दो बार मनाया जाता है – एक बार चैत्र माह की शुक्लपक्ष पूर्णिमा तिथि पर और दूसरी बार कार्तिक माह की कृष्णपक्ष चतुर्दशी तिथि पर।

हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयंती का पर्व श्रद्धा और भक्ति से जुड़ा होता है और इसे विशेष रूप से भगवान हनुमान की पूजा और अर्चना करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन हनुमान जी की पूजा करके अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं। ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार, इस बार चैत्र शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि शुक्रवार, 11 अप्रैल को रात 3:22 बजे से प्रारंभ होगी और शनिवार, 12 अप्रैल को सुबह 5:41 बजे तक रहेगी।

इस विशेष अवसर पर व्रत और पूजा अर्चना का महत्व और भी बढ़ जाता है, खासकर जब यह दिन शनिवार को पड़ता है। शनिवार के दिन हनुमान जयंती होने से यह पर्व अधिक पुण्यकारी और फलदायी हो जाता है।

हनुमान जयंती पर पूजा विधि

हनुमान जयंती के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन भक्तों को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर, व्रत का संकल्प लेकर भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी के विग्रह को चमेली के तेल, शुद्ध घी और सिंदूर से सजाया जाता है। इसके बाद, भक्तजन उन्हें बेसन और बूंदी के लड्डू, पेड़ा, गुड़, नारियल, ऋतुफल आदि अर्पित करते हैं।

पूजा के दौरान विशेष रूप से “ॐ श्री हनुमते नमः” मंत्र का जप करना चाहिए और श्री हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, हनुमान सहस्रनाम, श्रीरामचरितमानस का पाठ करना लाभकारी होता है। रात्रि जागरण भी हनुमान जयंती के दिन विशेष रूप से किया जाता है, जिससे हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हनुमान और उनकी पौराणिक मान्यता

भगवान हनुमान को विशेष रूप से शिव के ग्यारहवें अंश और रुद्रावतार के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान के शरीर में सभी देवताओं की शक्तियाँ समाहित हैं, जिनमें इन्द्रदेव, सूर्यदेव, यमदेव, ब्रह्मदेव, और ब्रह्मा की शक्तियां शामिल हैं। हनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त है और उन्हें भक्तों के संकटों से उबारने वाला “संकटमोचन” माना जाता है।

हनुमान शब्द का अर्थ भी बहुत ही गूढ़ है। “ह” शिव, “नु” पूजा और प्रशंसा, “मा” श्री लक्ष्मी और श्री विष्णु और “न” बल और वीरता का प्रतीक है।

हनुमान जयंती पर राशियों के अनुसार विशेष उपाय

इस बार हनुमान जयंती पर 29 मार्च से ग्रहों में बड़े परिवर्तन हुए हैं, जिसमें शनि का विशेष प्रभाव देखा जा रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, हनुमान जयंती पर विभिन्न राशियों के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए:

मेष राशि: मेष राशि वालों को हनुमान जी को लाल चोला और सिंदूर अर्पित करना चाहिए, इससे शनि का प्रभाव कम होगा और हनुमान जी का आशीर्वाद मिलेगा।

वृषभ राशि: वृषभ राशि के लोग हनुमान जी को दूध से बनी सफेद वस्तुएं अर्पित करें और प्रसाद वितरण करें।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों को हनुमान जी के सामने पांच हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और पान अर्पित करना चाहिए।

कर्क राशि: कर्क राशि के लोग सुंदरकांड का पाठ करें और तुलसी की माला अर्पित करें, यह उपाय उन्हें स्वास्थ्य लाभ देगा।

सिंह राशि: सिंह राशि वालों को नारंगी रंग का सिंदूर अर्पित करना चाहिए और हनुमान अष्टक या हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

कन्या राशि: कन्या राशि के लोग हनुमान जी को तुलसी की माला और राम नाम लिखा वस्त्र अर्पित करें और लड्डू चढ़ाएं।

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