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Van Mahotsav : जल, जंगल और जमीन के संरक्षण से ही समृद्ध और संतुलित झारखंड का होगा निर्माण : हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री व कल्पना सोरेन ने किया वृक्षारोपण, 20 वन मित्रों व समिति प्रतिनिधियों को किया सम्मानित, तीन नए वाहनों को दिखाई हरी झंडी

by Nikhil Kumar
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रांची: 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री और विधायक ने शुक्रवार को खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े तीन नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। इसका प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और वन्यजीवों पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना ही सतत भविष्य की वास्तविक कुंजी है।

हेमंत सोरेन ने कहा कि जल, जंगल और जमीन झारखंड की सबसे बड़ी धरोहर हैं। इनके संरक्षण के बिना समृद्ध और संतुलित झारखंड की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाए। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान में स्थानीय, फलदार, औषधीय, छायादार तथा वन्यजीवों के लिए उपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता देगी। इससे हरित आवरण बढ़ने के साथ भूजल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण, मानव जीवन और वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रजातियों का चयन करना आवश्यक है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं

पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण जरूरी

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी की प्रकृति तथा क्षेत्र की जैव विविधता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति के अनुकूल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ देने वाली वृक्षारोपण योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, ताकि झारखंड को अधिक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित राज्य बनाया जा सके।

बाढ़ जैसी आपदाओं से भारी क्षति हो रही

असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ रहा है। बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा संरक्षित वन क्षेत्रों को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं तथा उनके जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। कई बार वन्यजीवों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में अपने मूल आवास छोड़ने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अस्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं।

पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकार के जिम्मेदारी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि जनभागीदारी के साथ वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाए तो झारखंड हरित और पर्यावरण-संतुलित राज्य के रूप में नई पहचान बना सकता है। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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