
बेहतर समन्वय और प्रभावी रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर दिया गया है जोर
रांची : शुक्रवार को जून 2026 में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक की जारी कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक झारखंड में सभी बैंकों द्वारा वितरित कुल कृषि ऋण 25,498 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्य के कुल बैंक ऋण का 13.99 प्रतिशत है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए निर्धारित 18 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक की तुलना में यह अब भी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि झारखंड की अर्थव्यवस्था का आधार है। ऐसे में कृषि ऋण प्रवाह को राष्ट्रीय मानक तक पहुंचाने के लिए बैंकों, नाबार्ड, राज्य सरकार, एसएलबीसी और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में ऋण बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
किसान क्रेडिट योजना की हो रही नियमित समीक्षा
एसएलबीसी ने बताया है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित समीक्षा की जा रही है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वितरण की निगरानी, जिलावार लक्ष्य निर्धारण, वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों का विस्तार, बैंक शाखाओं और बैंक मित्र नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समन्वय समितियों के माध्यम से ऋण वितरण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों के लिए भी बैंकों को अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
13.67 लाख किसान क्रेडिट कार्ड सक्रिय
रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक राज्य में 13.67 लाख किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सक्रिय हैं। इनके माध्यम से 9,402.94 करोड़ रुपये का बकाया फसल ऋण है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में करीब 1.70 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए, जबकि 1,226.80 करोड़ रुपये का नया फसल ऋण किसानों को वितरित किया गया।
झारखंड ग्रामीण बैंक रहा सबसे आगे
जून तिमाही में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण वितरण में झारखंड ग्रामीण बैंक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। बैंक ने 597.67 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित किया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक ने 138.75 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया ने 125.31 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 81.69 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया। रिपोर्ट में सभी बैंकों से कृषि ऋण का दायरा बढ़ाने, अधिक से अधिक पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने और कृषि एवं कृषि-संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण वितरण में तेजी लाने का आह्वान किया गया है। एसएलबीसी का मानना है कि कृषि वित्तपोषण में वृद्धि से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी

