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Jharkhand Tiger News : झारखंड में अभी हैं छह टाइगर, बढ़ सकती है बाघों की संख्या, जल्द मिलने वाली है खुशखबरी

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में युवाओं को दिया वन्यजीव संरक्षण का संदेश

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : झारखंड में वन विभाग टाइगर कंजर्वेशन पर काम कर रहा है। अभी झारखंड में टाइगरों की संख्या पिछली गणना के अनुसार छह है। माना जा रहा है कि प्रदेश में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। पिछले दिनों झारखंड में टाइगरों की गिनती कराई गई है। टाइगर एस्टीमेशन का काम पूरा हो गया है। इसका रिजल्ट आने वाला है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसका रिजल्ट आएगा और प्रदेशवासियों को इस बात की खुशखबरी मिलेगी कि झारखंड में अब टाइगरों की संख्या बढ़ गई है।

जमशेदपुर में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया गया। इस मौके पर बुधवार को टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क (जू) में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला वन पदाधिकारी सबा आलम अंसारी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बाघ संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

मीडिया से बातचीत में जिला वन पदाधिकारी सबा आलम अंसारी ने कहा कि भारत आज बाघ संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाघों के संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूकता आई है। करीम सिटी कॉलेज, को-ऑपरेटिव कॉलेज, वर्कर्स कॉलेज समेत विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं वन्यजीव संरक्षण अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

बाघों की संख्या अधिक तो जंगल समृद्ध

उन्होंने कहा कि जहां बाघों की संख्या अधिक होती है, वहां जंगल भी समृद्ध होते हैं और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे और पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में बाघ सुरक्षित हैं, तो इसका मतलब है कि वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है। बाघों के लिए आवश्यक भोजन, वन्यजीव और हरियाली उपलब्ध होना स्वस्थ जंगल की पहचान है।

घने जंगलों से है झारखंड की पहचान

उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसके घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों से रही है। औद्योगिक विकास के बावजूद राज्य में वन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है और युवा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम में शामिल एक छात्रा ने बताया कि जिला वन पदाधिकारी ने विद्यार्थियों को दुनिया और भारत में बाघों की वर्तमान स्थिति तथा उनके संरक्षण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब स्कूल और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति पहले से अधिक जागरूक हैं।

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