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Jharkhand Crime: झारखंड में सुरक्षाबलों के रडार पर अब भी 31 खूंखार माओवादी, टोंटो में दिखा था 1 करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा!

झारखंड में माओवाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। अब बचे 31खूंखार और भगोड़े माओवादियों को पकड़ने या उन्हें खत्म करने के लिए रणनीति पर काम चल रहा है।

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड में सुरक्षाबलों के रडार पर 31 बड़े खूंखार माओवादी रह गए हैं। नक्सलियों के खिलाफ पुलिस और सुरक्षाबलों के चले अभियान में ज्यादातर माओवादियों का या तो सफाया हो गया है या फिर वे जेल में कैद हैं। राज्य में माओवाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। अब बचे 31खूंखार और भगोड़े माओवादियों को पकड़ने या उन्हें खत्म करने के लिए रणनीति पर काम चल रहा है। केंद्रीय खुफिया एजेंसी और राज्य की स्पेशल ब्रांच की टीमें जंगलों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक पूरी तरह मुस्तैद हैं। 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा को कुछ दिनों पूर्व टोंटो के जंगलों में देखा गया था।

​सुरक्षा एजेंसियों को हाल ही में माओवादियों के शीर्ष नेताओं की गतिविधियों की सटीक जानकारी मिली है। इसके मुताबिक 1 करोड़ रुपये का इनामी और भाकपा माओवादी का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर जुलाई के दूसरे हफ्ते में पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के टोंटो स्थित मुरूम्बुरा की पहाड़ियों में देखा गया था। उसके साथ 15 लाख का इनामी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव हांसदा जैसे खूंखार नक्सली भी थे।

बोड़ाम क्षेत्र में मिला आकाश का लोकेशन

1 करोड़ रुपये के ही एक अन्य इनामी सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल उर्फ आकाश का लोकेशन बोड़ाम के जरकी गांव से लगे सीमावर्ती इलाके में मिला है। इसके साथ 15 लाख का इनामी सचिन मार्डी और रवि सिंह सरदार भी घूम रहे थे। वहीं सोनुआ इलाके के नचलदा और केड़ाबीर के जंगलों में 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम का दस्ता सक्रिय रहा, जिसमें राहत और पिंकी जैसी नक्सली कैडर शामिल हैं।

​इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी छोटे-बड़े दस्तों की हलचल दर्ज की गई है। ​पलामू के छतरपुर इलाके में 15 लाख के इनामी नितेश यादव और 10 लाख के इनामी संजय यादव उर्फ गोदराय के दस्ते की मौजूदगी का इनपुट मिला था। चतरा लावालौंग के पसागम के जंगलों में 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर मनोहर गंझू का दस्ता देखा गया है।

​जबकि नेतरहाट के कोरगी गांव के आसपास 5 लाख के इनामी सब-जोनल कमांडर राजू भूईयां की घेराबंदी के लिए पुलिस जुटी हुई है।
​सुरक्षाबलों का साफ मानना है कि जब तक शीर्ष कमांडर जंगलों में मौजूद हैं, तब तक खतरा बना रहेगा। यही वजह है कि इन सटीक इनपुट्स के आधार पर अब आर-पार की जंग शुरू हो चुकी है, ताकि झारखंड को पूरी तरह नक्सल-मुक्त बनाया जा सके।

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