रांची/आरा : झारखंड पुलिस से जुड़े एक सनसनीखेज हत्याकांड ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड पुलिस में तैनात एक हवलदार की बिहार में छुट्टी के दौरान गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना बिहार के भोजपुर जिले के आरा अंतर्गत चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर गांव की है। मृतक की पहचान पशुपति नाथ तिवारी के रूप में हुई है, जो झारखंड के हजारीबाग जिले में चालक हवलदार के पद पर पदस्थापित थे।
छुट्टी पर गांव आए थे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पशुपति नाथ तिवारी करीब एक सप्ताह पहले ही विभागीय अवकाश लेकर अपने पैतृक गांव भगवतपुर आए थे। शुक्रवार की रात वे अपने घर के कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने धारदार हथियार से उनका गला रेतकर हत्या कर दी। वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे किसी को भनक तक नहीं लगी।
सुबह कमरे में खून से लथपथ मिला शव
शनिवार सुबह जब परिजन उन्हें जगाने कमरे में पहुंचे, तो अंदर का दृश्य देखकर सन्न रह गए। हवलदार का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। उनकी गर्दन पर धारदार हथियार से किए गए गहरे घाव के स्पष्ट निशान मिले हैं। प्रथम दृष्टया यह मामला नृशंस हत्या का प्रतीत हो रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया।
जनवरी 2026 में होने वाले थे सेवानिवृत्ति
बताया जा रहा है कि हवलदार पशुपति नाथ तिवारी जनवरी 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। सेवानिवृत्ति से कुछ महीने पहले हुई इस हत्या ने न सिर्फ उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पुलिस महकमे में भी शोक और आक्रोश का माहौल है।
पुलिस जांच में जुटी, हर पहलू की हो रही पड़ताल
घटना की सूचना मिलते ही चांदी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। हत्या के पीछे आपसी रंजिश, पुरानी दुश्मनी या अन्य किसी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच की जा रही है।
झारखंड और बिहार पुलिस के बीच समन्वय
चूंकि मृतक झारखंड पुलिस में पदस्थापित थे, इसलिए इस हत्याकांड को लेकर झारखंड पुलिस भी सक्रिय हो गई है। हजारीबाग पुलिस द्वारा बिहार पुलिस से संपर्क कर मामले की जानकारी ली जा रही है। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर हत्यारों तक पहुंचने की कोशिश तेज कर दी गई है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कानून के रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है।

