
तकनीकी खामियों के साथ जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी की गई चिह्नित
इस महीने के अंत तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास पहुंच जाएगी रिपोर्ट
महालेखाकार की जांच में सामने आया था वेतन मद से अवैध निकासी का मामला
बोकारो में 3.15 व हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय से 15.41 करोड़ की हुई है अवैध निकासी
Ranchi : बोकारो और हजारीबाग के बहुचर्चित कोषागार घोटाले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। झारखंड सरकार द्वारा आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी बोकारो जिले की जांच लगभग पूरी करने के करीब है। कमेटी की ओर से अब तक जुटाए गए दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर तकनीकी खामियों के साथ जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी चिह्नित की जा रही है। माना जा रहा है कि अगले 8 से 10 दिनों में बोकारो से संबंधित रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसी महीने के अंत तक इसे मुख्यमंत्री को सौंपा जा सकता है। इसके बाद कमेटी हजारीबाग में जांच शुरू करेगी।
बोकारो और हजारीबाग में कोषागार से वेतन मद की रकम में फर्जी निकासी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया था। बता दें कि बोकारो में 3.15 करोड़ और हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय से 15.41 करोड़ से अधिक की राशि अवैध तरीके से वेतन मद से किए जाने का मामला महालेखाकार और वित्त विभाग की जांच में सामने आया था।
अप्रैल में सामने आया मामला, सीएम ने दिए थे जांच के आदेश
कोषागार से फर्जी निकासी का मामला अप्रैल 2026 में सामने आया। हजारीबाग में पुलिस विभाग के वेतन मद से संदिग्ध निकासी की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ। हालांकि सीआईडी जांच आगे बढ़ने पर करीब 39 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का आंकड़ा सामने आया। वहीं बोकारो में पुलिस विभाग के वेतन मद से रकम निकाले जाने का मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के कोषागारों में वेतन मद से हुई निकासी की व्यापक जांच के निर्देश दिए थे। प्रधान महालेखाकार कार्यालय की ओर से कोषागार रिकॉर्ड की जांच के दौरान संदिग्ध निकासी की जानकारी सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ा।
आपराधिक मामलों की जांच कर रही सीआईडी
फर्जी निकासी से जुड़े मामलों की आपराधिक जांच सीआईडी की एसआईटी कर रही है। बोकारो मामले में पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आई है। सीआईडी ने रकम के लेनदेन का पता लगाने के साथ बैंक खातों में जमा रकम को फ्रीज करने की कार्रवाई भी की थी।
हजारीबाग मामले में भी सीआईडी की जांच आगे बढ़ी और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े बैंक खातों और लेनदेन की पड़ताल की गई। बाद में मामले में आरोपपत्र दाखिल किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
गहराई से की जा रही व्यवस्थागत खामियों की पड़ताल
सीआईडी की जांच जहां यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी राशि की फर्जी निकासी में कौन-कौन लोग शामिल थे और रकम कहां गई, वहीं अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली कमेटी का फोकस इससे अलग है। कमेटी यह देख रही है कि कोषागार की पूरी भुगतान व्यवस्था में ऐसी कौन-कौन सी तकनीकी और प्रक्रियागत खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर फर्जी निकासी संभव हुई। बोकारो की जांच में कमेटी को कई महत्वपूर्ण तथ्य मिलने की बात सामने आ रही है। भुगतान प्रक्रिया, रिकॉर्ड के मिलान, स्वीकृति और तकनीकी स्तर पर की जाने वाली जांच से जुड़े बिंदुओं को देखा जा रहा है। इसके साथ ही उन कर्मचारियों की भूमिका भी चिह्नित की जा रही है, जिनकी जिम्मेदारी के स्तर पर लापरवाही या चूक सामने आई है।
ज्यादातर मूल दस्तावेज एजी कार्यालय में उपलब्ध
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि कोषागार से भुगतान से संबंधित मूल बिल और उससे जुड़े रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा महालेखाकार कार्यालय में उपलब्ध रहता है। ऐसे में कमेटी को प्रत्येक मामले में जिलों से मूल दस्तावेज मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिल से जुड़े मूल अभिलेखों की जांच महालेखाकार कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर भी की जा सकती है। बोकारो से मंगाए गए दस्तावेज फिलहाल कमेटी के पास ही रहेंगे। इनके आधार पर जांच के अंतिम निष्कर्ष तैयार किए जा रहे हैं।
जिम्मेदार कर्मचारियों की लिस्ट भी तैयार
बोकारो की जांच में कमेटी ने केवल सिस्टम की तकनीकी कमियों पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। जिन स्तरों पर भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित जांच और सत्यापन नहीं हुआ, ऐसे कर्मचारियों की भूमिका को चिह्नित किया गया है। कमेटी की अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदारी और सिस्टम की खामियों दोनों का उल्लेख किए जाने की संभावना है।
जांच के बाद बनेगा नया SOP
इस पूरी जांच का एक बड़ा परिणाम कोषागार संचालन के लिए नया मानक संचालन प्रोटोकॉल (SOP) तैयार होना भी माना जा रहा है। कमेटी की रिपोर्ट में जिन खामियों और कमजोरियों की पहचान होगी, उन्हें दूर करने के लिए नई प्रक्रिया तैयार की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में फर्जी बिल, गलत वेतन विवरण या किसी अन्य माध्यम से सरकारी राशि की निकासी संभव न हो।

