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JPSC Scam: परीक्षा एजेंसी के निदेशक का बड़ा खुलासा-जेपीएससी अध्यक्ष के ऑपरेटर ने दी थी जेल भिजवाने की धमकी

JPSC धांधली मामले में परीक्षा एजेंसी निदेशक ने CID को कई अहम जानकारी दी।

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी, पेपर लीक और OMR शीट में हेराफेरी की जांच कर रही सीआईडी की पूछताछ में एक और बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है। परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी ‘मेसर्स टीडीपीएल’के निदेशक रामवीर सिंह ने CID के सामने रिश्वत और धमकियों के पूरे खेल की परतें खोल दी हैं।

​अध्यक्ष के रौब में चलता था सेटिंग का खेल

रामवीर सिंह के अनुसार, जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र इस पूरे नेटवर्क की मुख्य कड़ी था। उसके पास दलालों और एजेंटों का लगातार आना-जाना लगा रहता था। धर्मेंद्र, चेयरमैन के नाम का डर दिखाकर एजेंसी निदेशक पर मनमाफिक अभ्यर्थियों को पास कराने का दबाव बनाता था।

​सड़क पर हाथापाई और जेल भेजने की धमकी

रामवीर ने बताया कि इस अनुचित दबाव को लेकर एक बार रांची के हिनू चौक स्थित शनि मंदिर के पास उनकी और धर्मेंद्र की सड़क पर जमकर झड़प भी हुई थी। मामला यहीं नहीं थमा, धर्मेंद्र ने लालपुर स्थित कोचिंग संस्थान शिवांगन की पाठशाला से जुड़े रवि कुमार के साथ मिलकर उन्हें सीधी धमकी दी कि यदि उनके पसंदीदा अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ, तो वे फर्जी मामलों में फंसाकर रामवीर को जेल भिजवा देंगे।

​10-12 छात्रों को जबरन पास कराने की थी साजिश

एजेंसी निदेशक के अनुसार, धर्मेंद्र ने सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्र पदाधिकारी भर्ती परीक्षा में 10 से 12 अभ्यर्थियों का अवैध चयन कराने के लिए पेपर लीक करने का भारी दबाव डाला था। रामवीर ने जब इस बेईमानी से साफ इनकार किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्कालीन अध्यक्ष और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को दी, तब भी इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया और धांधली का खेल बेधड़क जारी रहा।

​सिविल जज भर्ती में भी बड़ा फेरबदल

पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि सिविल जज PT परीक्षा का ओरिजिनल रिजल्ट किसी अन्य थर्ड पार्टी एजेंसी ने तैयार किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब दो विवादित सवाल हटाए गए, तब रामवीर की कंपनी ने रिवाइज्ड मेरिट लिस्ट जारी की।

इस फेरबदल से पहले से सिलेक्टेड 200 छात्र बाहर हो गए और 200 नए अभ्यर्थियों की एंट्री हुई। इसी उथल-पुथल के बाद धर्मेंद्र ने खुलकर सौदेबाजी शुरू कर दी थी। ​फिलहाल सीआइडी के बयानों के आधार पर तथ्यों का सत्यापन कर रही है और कोचिंग संचालक रवि कुमार पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

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