
रांची: राज्य की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं जेपीएससी एवं जेएसएससी में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। पिछले 22 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच’ ने अब अपने आंदोलन को और उग्र करने का फैसला किया है।
स्वतंत्रता दिवस की शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र नेताओं ने सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया। छात्र नेताओं ने तीखे लहजे में कहा कि हमने 22 दिनों तक गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखी, लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा। अब सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के तेवर अपनाने का वक्त आ गया है। ‘नौकरी चोर, गद्दी छोड़’ के नारों के बीच अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि जब भ्रष्टाचार चरम पर है, तो जिम्मेदारी किसकी…।
आंदोलन की आगे की रणनीति
16 अगस्त : रांची के अल्बर्ट एक्का चौक समेत राज्य के सभी जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला फूंका जाएगा।
20 अगस्त: हजारों की तादाद में छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और मांगें पूरी होने तक वहीं डटे रहेंगे।
गंभीर आरोप और मांगें
मंच के प्रतिनिधियों पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार को 11वीं से 13वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षाओं को तुरंत रद्द करना होगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच CBI से कराने की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
छात्रों ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि महज हमदर्दी जताने से काम नहीं चलेगा। अगर कांग्रेस सच में युवाओं के साथ खड़ी है, तो उसे हेमंत सरकार से अपना समर्थन वापस लेना चाहिए।
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