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Noida Violence: 9 घंटे ‘बंधक’ रहा नोएडा: श्रमिकों का बवाल, 300 गिरफ्तार, 20 गाड़ियां जली

by Mujtaba Haider Rizvi
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नई दिल्ली : नोएडा और ग्रेटर नोएडा सोमवार को हिंसा की आग में झुलस उठा, जब वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे श्रमिकों का प्रदर्शन उग्र हो गया। पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को हिला दिया। हालात ऐसे बने कि शहर करीब 9 घंटे तक ‘बंधक’ बना रहा और आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

कब और कैसे भड़की हिंसा

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि शनिवार को ही तैयार हो गई थी, जब इकोटेक-3 थाना क्षेत्र में एक फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के दौरान गोली चलने से एक महिला कर्मी घायल हो गई। इसके बाद से श्रमिकों में आक्रोश लगातार बढ़ता गया। सोमवार सुबह हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। तीन प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में भीड़ फैल गई और कई जगहों पर पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई।

20 गाड़ियां जलीं, सैकड़ों इकाइयों में तोड़फोड़

उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों समेत 20 से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। कई फैक्ट्रियों और प्रतिष्ठानों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की गई।
सेक्टर-63, फेज-2 और फेज-3 औद्योगिक क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े, जहां सैकड़ों इकाइयों को नुकसान पहुंचाया गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस हिंसा में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति प्रभावित हुई है।

सड़कों पर जाम, पूरा शहर ‘बंधक’

हिंसा का असर पूरे शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। एनएच-9 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे समेत प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया।
सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक लोग सड़कों पर फंसे रहे। ऑफिस जाने वाले और वापस लौटने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 9 घंटे तक नोएडा मानो पूरी तरह ‘बंधक’ बना रहा।

पुलिस एक्शन: 300 गिरफ्तार, कई घायल

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बल प्रयोग किया गया।
हिंसा के दौरान 10 पुलिसकर्मी समेत करीब 30 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है और कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

सेक्टर-60, सेक्टर-63, फेज-2 और फेज-3 औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हिंसा देखने को मिली। ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों और मोबाइल निर्माण इकाइयों को खास तौर पर निशाना बनाया गया। कई जगहों पर पुलिस की गाड़ियों को पलट दिया गया और उनमें आग लगा दी गई।


प्रशासन अलर्ट, उद्योग बंद रखने का फैसला

घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। डीएम और पुलिस आयुक्त ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
वहीं, नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ने सुरक्षा कारणों से औद्योगिक इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया है। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।


क्या हैं श्रमिकों की मांगें?

श्रमिक लंबे समय से वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाना, ओवरटाइम का उचित भुगतान, समय पर सैलरी और सुरक्षित कार्य वातावरण शामिल हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा कुछ मांगें मानने की बात कही गई है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।

बड़ा सवाल: क्या टल सकता था ये बवाल?

श्रमिकों ने पहले ही आंदोलन की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके प्रशासन स्थिति का सही आकलन नहीं कर पाया।
अब सवाल उठ रहा है कि अगर समय रहते ठोस कदम उठाए जाते, तो क्या नोएडा को 9 घंटे तक ‘बंधक’ बनने से बचाया जा सकता था?

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