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संसद ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र से संबंधित विधेयक को दी मंजूरी, जाने इससे लोगों को क्या होगी सहूलियत

by Rakesh Pandey
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नयी दिल्ली: संसद ने सोमवार को ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023’ को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसमें लोगों की सुविधा के लिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के डिजिटल पंजीकरण के प्रावधान हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब दिया। उनके जवाब के बाद राज्यसभा ने विधेयक को ध्वनिमत से अपनी स्वीकृति दे दी। चर्चा के समय विपक्ष के ज्यादातर सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।

सरल हो जाएगा जन्म एवं मृत्यु के प्रमाणपत्र का पंजीकरण

चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक लोगों के लिए सुविधाओं को सुगम बनाने के मकसद से लाया गया है और यह जनहित में है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के संबंध में राज्यों, संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों से व्यापक परामर्श किया गया तथा आम लोगों से भी राय ली गयी है।

डिजिटल होने के कारण कम होगा मानवीय हस्तक्षेप

उन्होंने कहा कि इस विधेयक से जन्म एवं मृत्यु के प्रमाणपत्र का पंजीकरण सरल हो जायेगा, मानवीय हस्तक्षेप कम हो जाएगा और यह डिजिटल होगा। उन्होंने कहा कि यह ऐसा प्रमाण पत्र होगा जो विभिन्न कार्यों में भी मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न आपदा के पीडि़तों एवं उनके परिवारों को भी फायदा होगा।

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 का लेगा स्थान :

संक्षिप्त चर्चा में बीजू जनता दल की सुलता देव, भाजपा की सीमा द्विवेदी, वाईएसआर कांग्रेस के सुभाष चंद्र बोस पिल्ली और वी विजय साई रेड्डी, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने भी भाग लिया। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969, जन्म एवं मृत्यु के मामलों के पंजीकरण के नियमन को लेकर अमल में आया था। इस अधिनियम में अब तक संशोधन नहीं किया गया है और इसके संचालन की अवधि के दौरान सामाजिक परिवर्तन और तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखने और इसे अधिक नागरिक अनुकूल बनाने के लिए अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है।

इस विधेयक के पास होने के बाद मंत्री ने कहा कि समाज में आ रहे बदलाव और प्रौद्योगिकी उन्नति के साथ रफ्तार बनाये रखने एवं इसे नागरिकों की सुविधा के अनुकूल बनाने के लिए अधिनियम में संशोधन की जरूरत थी।

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