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Railways News: हादसे रोकने को पूर्वोत्तर रेलवे में ‘ट्रैक मेजरिंग ट्राली’ से पटरियों की होगी निगरानी, गोरखपुर से छपरा तक बदली जा रही हैं लाइनें

रेलवे पटरियों की गहराई में मौजूद दरारों और कमजोरियों को पकड़ने के लिए अल्ट्रा सोनिक डिटेक्शन मशीनें भी चलाई जा रही हैं। यह मशीनें एक्स-रे तकनीक की तरह काम करती हैं।

by Anurag Ranjan
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गोरखपुर : भारतीय रेलवे अब ट्रेनों की दुर्घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाने की दिशा में एक और ठोस कदम उठा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे में पटरियों की नियमित जांच और समतलीकरण के लिए अत्याधुनिक ‘ट्रैक मेजरिंग ट्राली’ लगाई जाएंगी, जो प्लेटफार्मों और प्वाइंट्स पर रेल लाइनों की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगी। इसके साथ ही गोरखपुर से छपरा तक 425 किमी रेल मार्ग पर पटरियां और स्लीपर बदले जा रहे हैं। ताकि रेलगाड़ियों की गति सीमा 130 किमी/घंटा तक बढ़ाई जा सके।

ट्रैक मेजरिंग ट्राली से होगी सटीक निगरानी

रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे समेत देश भर के जोन में 2964 ट्रैक मेजरिंग ट्रालियां खरीदी जा रही हैं, जिनमें 105 ट्रालियां केवल पूर्वोत्तर रेलवे को मिलेंगी। ये ट्रालियां पटरियों की सतह को स्कैन करके टेक्निकल खामियों की पहचान करेंगी ताकि समय रहते उनकी मरम्मत हो सके।

अल्ट्रा सोनिक मशीन से मिलेगी अंदरूनी जानकारी

रेलवे पटरियों की गहराई में मौजूद दरारों और कमजोरियों को पकड़ने के लिए अल्ट्रा सोनिक डिटेक्शन मशीनें भी चलाई जा रही हैं। यह मशीनें एक्स-रे तकनीक की तरह काम करती हैं और रेल लाइन की अंदरूनी स्थिति का सटीक ब्यौरा देती हैं।

पटरियों और स्लीपरों का बदलाव अंतिम चरण में

रेलवे प्रशासन गोरखपुर-बाराबंकी-छपरा मार्ग की गति क्षमता को बढ़ाने के लिए लाइन और स्लीपर को दिसंबर 2025 तक पूरी तरह बदलने में जुटा है। इस परिवर्तन के बाद ट्रेनें 110 की बजाय 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगी, जिससे यात्रा में समय की बचत होगी।

दुर्घटनाओं में आई भारी कमी

रेलवे के इन उपायों के चलते पूर्वोत्तर रेलवे जोन में ट्रेन दुर्घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। सिर्फ गोंडा में 2024 में एक दुर्घटना हुई थी, जिसे इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही माना गया। लखनऊ और वाराणसी मंडलों में 2021-22 और 2022-23 में एक भी हादसा नहीं हुआ।

रेलवे बोर्ड की रणनीति

रेलवे बोर्ड ने सभी महाप्रबंधकों को पत्र भेजकर ट्रैक ट्राली और निगरानी प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पटरियों की गुणवत्ता पर रियल टाइम डेटा के आधार पर कार्य किया जाएगा।

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