
रांची: देश में शुरू हो रही जातीय जनगणना के तरीकों को लेकर पिछड़ा वर्ग में नाराजगी गहराने लगी है। शनिवार को राजधानी रांची के परमवीर अल्बर्ट एक्का चौक पर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा (झारखंड इकाई) ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की और जनगणना से जुड़ी अधिसूचना की प्रतीकात्मक प्रति का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया।
ओबीसी के लिए अलग कॉलम न होने पर जताया ऐतराज
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब देश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गिनती के लिए फॉर्म में अलग से स्पष्ट कॉलम (वर्ग) दिया जाता है, तो फिर अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ यह भेदभाव क्यों? मोर्चा का दावा है कि ओपन इंडिकेटर या सामान्य विकल्प के जरिए ओबीसी की सही और सटीक गिनती होना नामुमकिन है।
केंद्र सरकार पर बोला हमला
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने कहा, लंबे संघर्षों के बाद केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराने के लिए तैयार हुई थी, लेकिन जिस तरह से फॉर्म तैयार किया गया है, उससे ओबीसी समाज को उनका वास्तविक हक नहीं मिल पाएगा। उन्होंने आगे कहा ड्रॉपडाउन सिस्टम के जरिए ओबीसी की जाति और उपजाति दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। सही गिनती न होने से सरकारी योजनाओं, आरक्षण और विकास में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी प्रभावित होगी।
जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया में तुरंत हो संशोधन
उन्होंने केंद्र सरकार की इस व्यवस्था को ओबीसी विरोधी और देश के समावेशी विकास में बाधक करार दिया। राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया में तुरंत संशोधन किया जाए। मोर्चा की साफ मांग है कि जनगणना प्रपत्रों में ओबीसी के लिए अलग से स्पष्ट कॉलम जोड़ा जाए, ताकि समाज की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा देश के सामने आ सके। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन सिर्फ झारखंड तक सीमित न रहकर पूरे देश में और तेज़ होगा।
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