
रांची: झारखंड की राजधानी कांची की एक विशेष पाक्सो अदालत ने इंसानियत को शर्मसार करने वाले एक बेहद गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो नाबालिग मौसेरी बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में मुख्य आरोपी सुशील उरांव को दोषी पाते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह दर्दनाक घटना 17 अप्रैल 2024 की है। दोनों पीड़ित नाबालिग बहनें चान्हो इलाके के हूंटार गांव में लगे एक मेले को देखने गई थीं। मेले में उनके साथ दो नाबालिग लड़के भी थे। मेला खत्म होने पर चारों एक ही मोटरसाइकिल पर बैठकर वापस घर के लिए निकले।
रास्ते में उन लड़कों की नीयत खराब हो गई। वे दोनों बहनों को उनके घर छोड़ने के बजाय अपने घर ले गए। लड़कियों ने घर वापस जाने की जिद की। इस पर आरोपियों ने थोड़ी देर में छोड़ने का झूठा भरोसा दिलाया। इसके बाद दोनों नाबालिग लड़कों ने जबरन उन बहनों के साथ गलत काम किया।
दरिंदगी में दोस्त को भी रखा साथ
उसकी दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। वारदात के दौरान उन लड़कों ने अपने दोस्त सुशील उरांव को भी फोन करके मौके पर बुला लिया। वहां पहुंचने के बाद सुशील उरांव ने भी एक नाबालिग लड़की के साथ हैवानियत की। घटना के बाद किसी तरह एक पीड़िता उन दरिंदों के चंगुल से भाग निकली और रोते हुए अपने घर पहुंची। उसने परिवार वालों को आपबीती सुनाई।
वहीं, दूसरी बहन को आरोपी रात भर बंधक बनाकर रखने के बाद अगले दिन बीजुपाड़ा-खलारी रोड के पास जंगल में लावारिस हालत में छोड़ दिया। फिर वे फरार हो गए। पुलिस ने बाद में उसे जंगल से बरामद किया।
पीड़िता की शिकायत पर मांडर थाने में केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की। अदालत ने दोनों बच्चियों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर सुशील उरांव को कड़ा सबक सिखाया। मामले में शामिल अन्य दो नाबालिग आरोपियों के खिलाफ कानून (किशोर न्याय अधिनियम) के तहत अलग से कानूनी प्रक्रिया चलाई जा रही है।
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