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Jharkhand News: सिल्ली में खेरबेड़ा डैम टूटा, पानी में डूबी किसानों की मेहनत,मवेशी बहे, बाजारों और घरों में घुसा पानी

​प्रशासनिक लापरवाही पड़ी भारी, पहले से हो रहे रिसाव को किया अनदेखा, आधा दर्जन गांवों का संपर्क भंग

by Kanchan Kumar
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रांची : सिल्ली प्रखंड की गोडाडीह पंचायत स्थित बाहमनी गांव के पास शनिवार को उस समय चीख-पुकार मच गई, जब 15 एकड़ में फैला खेरबेड़ा डैम अचानक टूट गया। डैम की दीवार ध्वस्त होते ही पानी का सैलाब काफी रफ्तार से आसपास के इलाकों में फैल गया। जलप्रलय की इस अचानक आई आफत ने महज कुछ ही मिनटों में लगभग 500 किसानों के खून-पसीने से लहलहाती फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।

​सड़कों पर बहने लगा पानी

डैम टूटने के बाद पानी का उफान इतना भयानक था कि गोडाडीह-सिल्ली मुख्य मार्ग जलमग्न हो गया। सड़क पर घुटनों से ऊपर बहते तेज बहाव के कारण गोडाडीह, बाहमनी, सतपालू, पलाशडीह, पेन टोला, नायक टोला और मुस्लिम टोला समेत करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय व आसपास के बाजारों से पूरी तरह कट गया। तेज धार में कई बेजुबान मवेशी भी बह गए। इसके अलावा स्थानीय बाजारों, गलियों और लोगों के घरों के भीतर पानी और कीचड़ घुस गया, जिससे भारी तबाही देखने को मिली।

​अधिकारियों की अनदेखी पड़ी महंगी

क्षेत्रीय ग्रामीणों में इस आपदा को लेकर भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से डैम लबालब भर चुका था और उसकी दीवारों से पिछले कई दिनों से पानी का रिसाव हो रहा था। ग्रामीणों ने समय रहते संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी लिखित और मौखिक जानकारी दी थी। लेकिन विभाग की घोर लापरवाही और समय पर मरम्मत न कराने की वजह से आखिरकार यह बड़ा हादसा हो गया।

​रोजी-रोटी का संकट, शिविर लगाकर मुआवजे की मांग

तकरीबन एक घंटे तक चले खौफनाक मंजर के बाद जब पानी का बहाव कुछ कम हुआ, तब जाकर लोगों ने जान जोखिम में डालकर आवाजाही शुरू की। अपनी तैयार फसलें बर्बाद होने से प्रभावित किसानों के सामने अब गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी से तुरंत नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। पूर्व मुखिया डब्लू महली ने प्रशासन से आग्रह किया है कि प्रभावित गांवों में तुरंत विशेष शिविर लगाया जाए, ताकि नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर पीड़ित किसानों को तत्काल राहत राशि दी जा सके।

​घटना की खबर मिलते ही घटनास्थल पर दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जब पानी का जलस्तर घटा, तो कुछ ग्रामीण बहकर आए पानी में मछलियां पकड़ते भी नजर आए। फिलहाल पूरा इलाका इस अप्रत्याशित तबाही के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है।
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