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Teachers Day Special : पवन चौबे के संगीत के सुरों से राष्ट्रीय मंच तक पहुंच रहे तुरामडीह के बच्चे

Teachers Day Special : आर्थिक तंगी से जूझ रहे बच्चों को भी देते हैं संगीत की शिक्षा, गुरु के मार्गदर्शन में कई छात्रों ने हासिल की राष्ट्रीय सफलता

by Mujtaba Haider Rizvi
Pawan Chaubey Music Training Turamdih Children
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Jamshedpur : शिक्षक दिवस पर जब गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा के महत्व की चर्चा होती है, तब शास्त्रीय (गायन)के कलाकार एवं परमाणु ऊर्जा शिक्षण संस्थान तुरामडीह के संगीत शिक्षक पवन चौबे का योगदान खास तौर से से सामने आता है। वह साल 2018 से बच्चों को संगीत की बारीकियां सिखा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में संस्थान के कई विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की संगीत प्रतियोगिताओं में कामयाबी हासिल की है। पवन चौबे का मानना है कि प्रतिभा किसी की जागीर नहीं होती। सही मार्गदर्शन और मेहनत मिले तो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

गुरु के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय स्तर पर चमके विद्यार्थी

साल 2019 में मुंबई में आयोजित ऑल इंडिया इंटर एईसीएस म्यूजिक कंपटीशन में संस्थान की छात्रा आयोनिका सेन गुप्ता ने तीसरा स्थान हासिल किया था। वहीं, वर्ष 2024 में मुंबई में आयोजित इसी प्रतियोगिता में देवराज श्रीवास्तव ने पहला और रुद्र नील दास ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। इन उपलब्धियों के पीछे पवन चौबे के निरंतर मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की मेहनत को अहम माना जाता है।

गरीब बच्चों को भी दे रहे अलग से संगीत की शिक्षा

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के ताजोपुर निवासी पवन चौबे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने गुरु पंडित गिरजा शंकर त्रिपाठी के सानिध्य में शुरू की थी। वर्तमान में वह कर्नाटक के धारवाड़ के पंडित कुमार मर्डुर से गायकी बारीकिया सीख रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर गायकी का करीब 20 वर्षों का अनुभव रखने वाले पवन चौबे स्कूल के बच्चों के अलावा आसपास के गरीब बच्चों को भी अलग से निशुल्क संगीत की शिक्षा देते हैं।

कहते हैं, पैसा हर वक्त मायने नहीं रखता

पवन चौबे बताते हैं कि इस क्षेत्र में पहले बच्चों की संगीत में ज्यादा रुचि नहीं थी। लेकिन लगातार प्रयासों से अब कई बच्चे गायकी और संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। देवराज श्रीवास्तव, रुद्र नील दास और आयोनिका सेन गुप्ता जैसी छात्राएं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। उनका कहना है कि पैसा हर वक्त मायने नहीं रखता। इलाके में कई ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे बच्चों की मदद करने के साथ वह उन्हें संगीत और गायन के टिप्स भी देते हैं।

बड़े शहरों में कार्यशालाएं, वाराणसी में जाकिर खान के कार्यक्रम में दी अपनी प्रस्तुति!

पवन चौबे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता बंगलौर जैसे बड़े शहरों में संगीत की कार्यशालाएं भी करते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले वाराणसी में कॉमेडियन जाकिर खान के कार्यक्रम में भी उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी | उनका प्रयास है कि बच्चों को संगीत की शिक्षा के साथ मंच पर प्रस्तुति देने का आत्मविश्वास भी मिले।

यह है गुरु का संदेश

पवन चौबे कहते हैं कि बच्चों को संगीत सिखाने का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं में जीत हासिल करना नहीं, बल्कि उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और अपनी प्रतिभा को पहचानने की क्षमता विकसित करना भी है। उनका मानना है कि एक शिक्षक की असली सफलता तब होती है, जब उसके विद्यार्थी उससे आगे बढ़कर अपना नाम रोशन करें।

पवन चौबे अपने जनपद उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के पंडित गिरजा शंकर त्रिपाठी से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने बीएचयू से संगीत से ही स्नातकोत्तर किया. अभी वनस्थली विद्यापीठ से पीएचडी कर रहे हैं।

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