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Ranchi News: साल 2019 में परिवार ने देखा था फ्लैट का सपना, बिल्डर के चलते 7 साल बाद भी नहीं हुआ पूरा

खरीदार हो गया परेशान, पैसे लेने के बाद भी आदित्या कंस्ट्रक्शन ने नहीं दिए दो फ्लैट

by Mujtaba Haider Rizvi
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Ranchi : संध्या सिंह ने वर्ष 2019 में एक फ्लैट का सपना देखा था। परंतु आदित्या कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी की वजह से सात साल बाद भी उनका सपना पूरा नहीं हुआ। संध्या सिंह ने बताया कि उनके पति सुजीत कुमार ने एक मेरे नाम से और दूसरा फ्लैट अपनी बेटी के नाम से कराया था। संध्या सिंह के नाम पर 55 लाख में तय फ्लैट का उन्होंने 44.76 लाख रुपये बैंक से कर्ज लेकर दे दिया। परंतु अब तक बिल्डर की ओर से उन्हें फ्लैट हैंडओवर नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि बिल्डर की बेरूखी के कारण उन्हें आज न तो फ्लैट मिला और न ही कोई भरोसा। उलटा हर महीने बैंक को बिना फ्लैट में रहे कर्ज का ईएमआइ चुकाना पड़ रहा है।

बिना फ्लैट में रहे देनी पड़ रही है ईएमआई

उन्होेंने कहा कि कुमारी निशा सिंह आदित्य कंस्ट्रक्शन की प्रोपराइटर हैं। परंतु उनका सारा काम उनके पति उपेंद्र सिंह हैंडल करते हैं। यहां तक कि ब्रोशर में भी निशा सिंह की जगह उपेंद्र सिंह का मोबाइल नंबर दिया गया। उन्होंने बताया कि मेरे पति सुजीत सिंह (जमशेदपुर) ने बेटी और मेरे नाम से हटिया के संडे बाजार स्थित प्राण एंक्लेव में मार्च 2019 में दो फ्लैट बुक कराया था। बुकिंग की राशि छह लाख रुपये नकद उनके पति द्वारा बिल्डर निशा सिंह के पति उपेंद्र सिंह को दिया गया था। उस वक्त निशा सिंह के पति ने इसका कच्ची रसीद भी अपने हस्ताक्षर से दिया था। फ्लैट 5ए (नुपुर राठौर) और 5बी (संध्या सिंह)पांचवा तल्ला पर बुक हुआ था। 5ए का 49,77,156 रुपये था और 5बी का 55लाख रुपये तय था। इसमें नुपुर के फ्लैट 5ए में 49 लाख 96 हजार 160 रुपये कैश और बैंक के लोन के द्वारा आदित्या कंस्ट्रक्शन को दिया गया। वहीं, फ्लैट 5बी में उन्होंने बैंक के लोन के द्वारा 44 लाख 76 हजार 467 रुपये का भुगतान आदित्या कंस्प्ट्रक्शन के बिल्डर के तौर पर काम देख रहे उपेंद्र सिंह को दिया गया। परंतु उन्हें अब तक फ्लैट की चाभी नहीं दी गयी है। एग्रीमेंट के मानक और गुणवत्ता के अनुसार फ्लैट का काम बिल्डर ने नहीं किया।

एजी ऑफिस के कर्मचारी हैं उपेंद्र सिंह

संध्या सिंह ने बताया कि आदित्या कंस्ट्रक्शन की मालकिन के पति उपेंद्र सिंह एजी आॅफिस में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। वह, अपनी पत्नी के नाम से आदित्या कंस्ट्रक्शन बना कर झारखंड के कई शहरों में बहुमंजिला इमारत बनाकर बेचते हैं। आरोप है कि आदित्या कंस्ट्रक्शन की प्रोपराईटर की ओर से प्रोपर तरीके से जीएसटी का भुगतान भी नहीं किया जाता है। जो जांच का विषय है। वह, फ्लैट के खरीदारों को एजी ऑफिस के बड़े अधिकारियों धौंस दिखाते हैं। संध्या सिंह के अनुसार, बेटी के फ्लैट में कोई बकाया नहीं है। मेरे फ्लैट में मात्र दस लाख रुपया बकाया है। अनकों बार पत्र लिखने के बाद कोई काम नहीं किया।

वर्जन

हालांकि इसे लेकर उपेंद्र सिंह से उनके मोबाइल नंबर 75490-77777 पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उनकी ओर से कोई ईश्यू नहीं है। बिल्डर की ओर से कहा गया कि मामला दो साल से रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) में चल रहा है। यहां सिर्फ इगो की लड़ाई है। रही बात काम की बात, तो फर्नीचर का काम उन्होंने स्वयं कराया है। अगर कोई शिकायत थी, उन्हें फिनिशिंग कराने से पहले ईश्यू को खत्म कर लेना चाहिये था।

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