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FCRA Amendment Bill 2026 : पलामू सांसद वीडी राम को संसद से मिली बड़ी जिम्मेदारी, FCRA संशोधन विधेयक की करेंगे समीक्षा

एफसीआरए विधेयक पर 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है। इसमें सांसद विष्णु दयाल राम को भी शामिल किया है।

by Kanchan Kumar
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पलामू : पलामू सांसद विष्णु दयाल राम को सदन में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए) संबंधी संयुक्त संसदीय समिति का सदस्य मनोनीत किया है। एफसीआरए विधेयक पर 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है।

इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति आभार जताया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उन्हें सौंपे गए इस दायित्व का वे पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करेंगे। संसद की ओर से सौंपा गया यह दायित्व उनके लिए महत्वपूर्ण है और वे समिति के कार्यों में पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ अपना योगदान देंगे। विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श और अध्ययन के माध्यम से देशहित में अपना सार्थक योगदान देने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

भाजपा के संजय जायसवाल होंगे अध्यक्ष

31-सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा के लोकसभा सदस्य संजय जायसवाल करेंगे। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। इस समिति में लोकसभा से भाजपा के डा. संजय जायसवाल के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम शामिल हैं।

वहीं कांग्रेस के एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, समाजवादी पार्टी के जियाउर रहमान, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, द्रमुक के ए. राजा, तेलुगुदेशम पार्टी के लावू श्रीकृष्ण देवरायलु, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, आइयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर तथा कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं।

राज्यसभा से भाजपा सदस्य उज्ज्वल निकम, डॉ. अलका गुर्जर, हर्षवर्धन शृंगला, सतपाल शर्मा, राकांपा के प्रफुल्ल पटेल, जनता दल (यू) के संजय कुमार झा, कांग्रेस के क्रिस्टोफर तिलक, द्रमुक के पी विल्सन और कुछ अन्य सदस्य समिति में शामिल किए गए हैं।

कई विपक्षी दलों की आलोचना और विभिन्न परमार्थ संगठनों की मांग के बाद 12 अगस्त को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था।

विदेशी वित्त-पोषित संगठनों पर निगरानी

लोकसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया था कि समिति 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा को रिपोर्ट सौंपेगी। इस विधेयक में विदेशी वित्त-पोषित संगठनों पर निगरानी के साथ यह प्रस्ताव किया गया था कि लाइसेंस गंवाने वाली गैर-लाभकारी संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त करने और इनका प्रबंधन करने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाया जाएगा।

इसमें विदेशी अंशदान और संपत्तियों के पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक वैधानिक ढांचे का प्रविधान भी किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 16 हजार संगठन अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं। इन्हें सालाना लगभग 22 हजार करोड़ रुपये मिलते हैं।

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