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Chaibasa News : ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रही विद्या भारती के विद्यालय : गीता कोड़ा

पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में प्रांतीय प्रधानाचार्य बैठक का शुभारंभ, बैठक में पूरे झारखंड प्रांत से 93 प्रधानाचार्य शामिल हुए

by Hari Shankar Gope
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चाईबासा : पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर चाईबासा में शनिवार को प्रांतीय प्रधानाचार्य बैठक का उद्घाटन किया गया। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में पूरे झारखंड प्रांत से 93 प्रधानाचार्य शामिल हुए। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद गीता कोड़ा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव, संगठन मंत्री ख्याली राम, प्रदेश सचिव नकुल कुमार शर्मा, विद्या विकास समिति के सदस्य अरविंद सिंह, विभाग प्रचारक सत्य प्रकाश, विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष रामध्यान मिश्र, उपाध्यक्ष बजरंग लाल चिरानिया, कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार गुप्ता तथा प्रधानाचार्य विपिन कुमार दास उपस्थित थे। सर्वप्रथम प्रधानाचार्य बिपिन कुमार दास के द्वारा अतिथि परिचय कराया गया। इसके बाद उपस्थित पदाधिकारी को स्मृति चिन्ह, शाॅल एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। उसके बाद विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत एवं एकल गीत प्रस्तुत किया गया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि गीता कोड़ा ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। आज के इस युग में बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए हमें खुद को अपडेट करने की आवश्यकता है। रामध्यान मिश्र ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रधानाचार्यो को विद्यालय के पठन-पाठन एवं नई शिक्षा नीति पर ध्यान देना चाहिए।

प्रदेश सचिव नकुल कुमार शर्मा ने कहा कि छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास करना हमारा लक्ष्य है।

बैठक में शामिल प्राचार्य

विद्यालय में निर्मित शिशु वाटिका पत्रिका “समृद्धि” का विमोचन

इस दौरान विद्यालय में निर्मित शिशु वाटिका पत्रिका “समृद्धि” का विमोचन उपस्थित पदाधिकारी द्वारा किया गया। ख्याली राम ने अपने उद्बोधन ने कहा कि हम संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष मना रहे हैं, उन्होंने कहा था कि हमें अपना काम मन लगाकर एवं ईमानदारी से करना चाहिए। आज के समय में सोशल मीडिया का प्रयोग द्वारा विद्यालय को अपने काम का प्रचार करना चाहिए। उन्होंने घोष वर्ग, पूर्व छात्र परिषद, समर्पण, संस्कृति बोध परियोजना चिंतन बिंदु पुस्तक इत्यादि के बारे में चर्चा की।

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