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Viksit Bharat Gramin Rozgar Yojana: 1 जुलाई से लागू होगी ‘वी बी जी राम जी’, झारखंड में नियम बनने बाकी

by Nikhil Kumar
MGNREGA work continues without disruption in Jharkhand and other states.
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मनरेगा होगा समाप्त, नई योजना से 320 प्रकार के होंगे विकास कार्य

रांची : देशभर में 1 जुलाई 2026 से नई ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन योजना-ग्रामीण’ (वी बी जी राम जी) लागू हो जाएगी। इसके साथ ही वर्तमान मनरेगा व्यवस्था की जगह नई प्रणाली प्रभावी होगी। नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण और गांवों का समग्र विकास करना है।
नई योजना के तहत करीब 320 प्रकार के विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें जल संरक्षण, सिंचाई, तालाब, चेकडैम, ग्रामीण सड़क, पुलिया, नाली, सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका से जुड़े कार्य तथा बाढ़, सूखा और अन्य चरम मौसम की घटनाओं से बचाव संबंधी कार्य शामिल होंगे। सभी कार्य ग्रामसभा द्वारा तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना के आधार पर चयनित होंगे और उनकी डिजिटल निगरानी की जाएगी।

प्रशासनिक तैयारियां पूरी करनी होगी

झारखंड में हालांकि नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने से पहले कई प्रशासनिक तैयारियां पूरी करनी होंगी। राज्य सरकार को बेरोजगारी भत्ता, भुगतान की प्रक्रिया, राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की कार्यप्रणाली, विलंब मुआवजा, लेखा-जोखा, शिकायत निवारण सहित विभिन्न नियम अधिसूचित करने होंगे। इसके अलावा ग्राम पंचायतों की योजनाएं तैयार कर उन्हें स्वीकृति देनी होगी तथा कृषि के बुवाई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए कार्य प्रतिबंधित अवधि भी अधिसूचित करनी होगी। फिलहाल राज्य में इन नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में झारखंड ने उठाए सवाल

29 जून को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नई योजना को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी के नाम से ही शुरू की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी उनकी पहचान और विरासत बनी रहे। मंत्री ने नई योजना के लिए किए गए बजटीय प्रावधान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यों की जरूरतों और बढ़े हुए रोजगार दिवस को देखते हुए उपलब्ध बजट पर्याप्त नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से योजना के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने और राज्यों की व्यावहारिक चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

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