चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में एक साल से मायके में रह रही अनाथ बेसहारा लड़की आरती तांती का घर जिला विधिक सेवा प्राधिकार चाईबासा और महिला थाना चक्रधरपुर की पहल पर फिर से बस गया। चक्रधरपुर थाना अंतर्गत ईचाकुटी निवासी सकारी केराई ने आरती को पिछले एक साल से अपने मायके में छोड़ रखा था। जिला विधिक सेवा प्राधिकार चाईबासा के पैरा लीगल वालंटियर मंजु बोयपाई की पहल पर मामले का समाधान निकाला गया। उनके प्रयास से दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और आरती तांती को ससुराल वापस भेजने की व्यवस्था की गई।
डालसा की भी रही भूमिका
मामले को सुलझाने में डालसा और महिला थाना चक्रधरपुर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दोनों संस्थाओं ने परिवारिक विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किया। सुलह के बाद गांव के ग्रामीण, मुंडा और मुखिया सहित पूरा परिवार आरती तांती को लेने चक्रधरपुर महिला थाना पहुंचा। परिवार ने आरती को सम्मान के साथ वापस ले जाकर घर बसाने का आश्वासन दिया।
थाने में हुआ समझौता
महिला थाना में सभी के सामने दोनों पक्षों के बीच समझौते पर सहमति बनी। पीएलवी मंजु बोयपाई ने कहा कि अनाथ और बेसहारा लड़कियों के हक के लिए डालसा हमेशा सक्रिय रहता है। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता कर लोगों को न्याय दिलाना और परिवार को टूटने से बचाना डालसा का मुख्य उद्देश्य है। इस मामले में भी आपसी बातचीत से समाधान निकाला गया, जिससे आरती का घर फिर से बस सका।
आरती तांती ने डालसा और महिला थाना का आभार जताते हुए कहा कि एक साल से वह मायके में रह रही थी। अब ससुराल जाने से उसे राहत मिली है। ग्रामीणों और मुंडा-मुखिया ने भी डालसा और पुलिस की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में समय पर हस्तक्षेप से परिवार टूटने से बचते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में मध्यस्थता कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।
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