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Ghatshila : युवा अनुसंधानकर्ताओं द्वारा गढा जाएगा भारत का भविष्य : कुलाधिपति, सोना देवी विश्वविद्यालय

Ghatshila : विकसित भारत 2047 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपयोगिता और भूमिका पर विचार करने का सुझाव दिया। प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को डीप टेक स्टार्ट अप्स तथा डीप टेक साॅवरेन का महत्व बताते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से दुनिया की समस्या को हल करने का प्रयास करें।

by Rajesh Choubey
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Ghatshila : सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानन्द आडिटोरियम में मंगलवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एसडीयू स्कूल और इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाॅजी तथा एसडीयू स्कूल आफ आईटी एण्ड कम्पयूटर साइंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यिालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने सभागार में उपस्थित सभी फैकल्टी तथा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सफल होने के लिए असफल होना जरूरी है। साथ ही कहा कि समाज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट विकसित करने का प्रयास करें। उन्होंने डिजिटलीकरण के कई उदाहरण देते हुए प्रोडक्ट का मतलब समझाया तथा विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में शोध, अनुसंधान तथा नवाचार के लिए प्रेरित किया। विकसित भारत 2047 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपयोगिता और भूमिका पर विचार करने का सुझाव दिया।

प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को डीप टेक स्टार्ट अप्स तथा डीप टेक साॅवरेन का महत्व बताते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से दुनिया की समस्या को हल करने का प्रयास करें। कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का समझाते हुए दुहराया कि भारत का भविष्य युवा अनुसंधानकर्ताओं द्वारा गढा जाएगा. कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने केंद्र सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दिए जा रहे सहयोग की चर्चा करते हुए बताया कि अनुसंधान एनुअल रिसर्च फाउंडेशन जैसी कई संस्थाएं वित्तीय सहयोग भी करती हैं और इसमें बंगलुरू, दिल्ली और मुंबई आगे निकल रहे हैं। स्टार्ट अप्स के हब बनते जा रहे हैं।

सोना देवी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डाॅ नित नयना ने रेलवे के चिनाब ब्रिज, इसरो द्वारा प्रक्षेपित चंद्रयान तथा भारत बायोटेक द्वारा बनाए गये कोरोना वैक्सिन की चर्चा करते हुए विज्ञान और तकनीक और नवाचार की महत्ता बताया। पूजा तिवारी ने बताया कि देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है। देश के सफल परमाणु परीक्षण के बाद से ही 11 मई 1999 से प्रतिवर्ष इस दिवस को मनाया जाता रहा है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में योगदान देने वाले सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को समर्पित है यह दिवस।

उन्होंने एक कविता के माध्यम से विज्ञान और तकनीक के संबंध में अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। इस मौके पर सीएसई के सहायक प्राध्यापक अनल बेरा, सहायक प्राध्यापक पतोत्रि माली ने विचार व्यक्त किया। बीसीए की छात्रा जया कुमारी ने भी एआई और आटोमेशन के बारे में पीपीटी प्रस्तुति दी. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रही छात्रा संजना मुंडा ने कहा कि तकनीक शक्तिशाली है लेकिन मानव मस्तिष्क उससे भी शक्तिशाली है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ तथा समापन राष्ट्र्र्रगान के साथ संपन्न हुआ. डिपार्टमेंट आॅफ मैनेजमेंट की विभागाध्यक्ष मोनिका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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