- तीन दांतों के साथ जन्मी बच्ची का कुत्ते से कराया गया विवाह
राजेश्वर पांडेय, चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में 21वीं सदी में भी आदिवासी बहुल क्षेत्र नोवामुंडी प्रखंड के नुईया गांव की अनूठी परंपरा चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार गुवा थाना अंतर्गत नुईया गांव निवासी मारकस कुंटिया की बच्ची के जन्म से ही मुंह में तीन दांत थे। इसे आदिवासी समाज में एक विशेष संकेत माना गया है। ऐसी परंपरा है कि ऐसी संतानों का विवाह कुत्ते या कुतिया से कराना आवश्यक होता है, ताकि परिवार के साथ-साथ गांव पर किसी तरह का संकट न आए, हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहे।
आदिवासी रीति रिवाज के अनुसार विधिवत पूजा अर्चना कर बच्ची का नामकरण तुलसी कुंटिया के रूप में किया गया। नुईया गांव के मुंडा दुरसू चाम्पिया ने बताया कि ऐसी संतान को दोषयुक्त माना जाता है। यदि समय रहते उसका विवाह कुत्ते से नहीं कराया गया, तो भविष्य में बच्चे का विकास बाधित होता है और परिवार और गांव में अशांति तथा बीमारियों का प्रकोप हो जाता है। इसी तरह कुत्ते का नामकरण जकड़ा चाम्पिया किया गया, जिसे परिला चाम्पिया परिवार ने गोद लिया। अब वह परिवार उसका ससुराल बना और पूरे विधि-विधान के साथ बारात लेकर ‘दुल्हन’ तुलसी कुंटिया के घर पहुंचा। आदिवासी समाज की मान्यता के अनुसार यह विवाह उसी तरह किया गया, जैसा सामान्य विवाह होता है।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर हुआ नाच-गान
शादी समारोह में गांव की महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने मिलकर पारंपरिक नृत्य किया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर गांव का माहौल पूरी तरह शादी के रंग में रंगा नजर आया। बारातियों के स्वागत में भोज का आयोजन भी किया गया। सजी हुई थाली में पारंपरिक व्यंजन परोसे गए और अतिथियों का आदर-सत्कार किया गया।

आदिवासी संस्कृति की झलक : परंपराएं आज भी जीवित
यह शादी न सिर्फ गुवा थाना क्षेत्र के नुईया गांव की परंपराओं को दर्शाती है, बल्कि यह बताया जाता है कि 21वीं सदी में भी आधुनिक युग में भी कुछ परंपराएं पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही हैं। आदिवासी समुदाय के लोग इन रीति-रिवाजों को सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक सुरक्षा की दृष्टि से देखते हैं।
विवाह समारोह में ये हुए शामिल
विवाह समारोह में गांव के प्रमुख मारकस कुंटिया, मेसली कुंटिया, लोदरी चाम्पिया, बारली चाम्पिया, मीनू चाम्पिया, सुमित्रा चाम्पिया, यशोदा बोयपाई, प्रधान बोयपाई, मंगल बोयपाई, मेसमी कुंटिया, नन्दी चाम्पिया, सुनीता चाम्पिया सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे।

