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JAC Result Update News खराब रिजल्ट के लिए स्कूलों ने शिक्षकों की कमी व छात्रों के स्कूल न आने को बताया मुख्य वजह, बोले- करेंगे सुधार

महुलिया उच्च विद्यालय घाटशिला ने बताया कि स्कूल में प्रधानाध्यापक के अलावा शिक्षकों के 10 पद स्वीकृत हैं। लेकिन, 9वीं और 10वीं में नामांकित करीब 500 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल 6 शिक्षक हैं। स्कूल ने इसे असंतुलित अनुपात बताया।

by Anurag Ranjan
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जमशेदपुर :झारखंड अधिविद्य परिषद की मैट्रिक परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले 45 स्कूलों को पूर्वी सिंहभूम जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने शोकॉज नोटिस भेजा था। इनसे खराब रिजल्ट पर जवाब मांगा गया था। अब तक 38 स्कूलों ने जवाब भेज दिया है। अधिकतर स्कूलों ने अपनी गलती मानने की बजाय बच्चों और शिक्षा विभाग को जिम्मेदार ठहराया है।

स्कूलों ने कहा कि कई बार चेतावनी देने के बाद भी बच्चे नियमित स्कूल नहीं आते। जो आते हैं, वे पूरा क्लास नहीं करते। शिक्षक डांटते हैं तो बच्चे झगड़ने लगते हैं। स्कूलों का कहना है कि जो बच्चे नियमित नहीं आते, उन्हीं का रिजल्ट खराब हुआ है। लगभग सभी स्कूलों ने शिक्षकों की कमी को भी बड़ी वजह बताया है। स्कूलों ने कहा कि 80 से 100 बच्चों पर एक शिक्षक पढ़ा रहे हैं, जबकि अनुपात 40:1 होना चाहिए। विभाग से शिक्षकों की मांग की गई है।

महुलिया उच्च विद्यालय घाटशिला ने बताया कि स्कूल में प्रधानाध्यापक के अलावा शिक्षकों के 10 पद स्वीकृत हैं। लेकिन 9वीं और 10वीं में नामांकित करीब 500 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल 6 शिक्षक हैं। स्कूल ने इसे असंतुलित अनुपात बताया। स्कूल ने कहा कि बच्चों की औसत उपस्थिति 60 से 65 प्रतिशत रहती है। अभिभावकों को कई बार समझाने के बाद भी वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। घर का काम करवाते हैं।

प्रोजेक्ट हाईस्कूल पोटका ने कहा कि अधिकतर बच्चियां अलग-अलग कारणों से स्कूल छोड़ देती हैं। सबसे आम कारण तबीयत खराब होना बताया गया है। स्कूल ने माना कि गणित विषय की वजह से रिजल्ट खराब हुआ है। इसे सुधारने की कोशिश की जा रही है।

स्कूलाें ने यह भी कहा

  • अभिभावक सहयाेग नहीं करते टीचर्स पैरेंट्स मीटिंग में नहीं आते हैं
  • आठवीं पास कर ऐसे बच्चे 9वीं में आ जाते हैं जिन्हें ए बी सी डी तक नहीं अाती ऐसे बच्चाें काे कितना और कैसे पढ़ाया जाए
  • बच्चाें से कई अभिभावक मजदूरी कराते जब उन्हें स्कूल भेजने काे कहा जाता है ताे वे एक दिन का मजदूरी मांगते हैं
  • पिछले वर्ष तीन महीने चुनाव में ही बीता ताे पढ़ाई कैसे पूरी हाेती
  • स्कूल आता ताे दूर कई बच्चे परीक्षा फाॅर्म भरने तक नहीं आते हैं उन्हे घर से ला कर फाॅर्म भरवाना पड़ता है

विभाग ने कहा जवाब के अध्ययन के बाद हाेगी कार्रवाई

वहीं शाेकाॅज नाेटिस के मिले जवाब पर जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि एक से दाे दिन में शत प्रतिशत स्कूलाें का जवाब अा जाएगा। जिसके बाद इसका अध्ययन कर इसके आलाेक में आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलाें काे जवाब संतोषप्रद नहीं हाेगा उनके खिलाफ कार्रवाई तय हैं। इसके साथ ही आगे कैसे रिजल्ट काे बेहतर किया जाएगा इस पर भी अभी से काम शुरू कर दिया जाएगा।

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