- उम्मीद पर खरा नहीं उतर सका पार्टी का नया-नवेला संगठन,
- प्रदेश पदाधिकारियों को भेजा गया जिला संगठन का रिपोर्ट कार्ड
Jamshedpur Political News : Jamshedpur : हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में जमशेदपुर में जबर्दस्त पटखनी मिलने के बाद अब भाजपा को मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए प्लान तैयार कर लिए गए हैं। योजना है कि नगर निकाय चुनावों के दौरान जिन लोगों ने पार्टी छोड़ी है उनकी घर वापसी कराई जाए। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। नगर निकाय चुनावों में पार्टी की हार के बाद पार्टी आलाकमान सतर्क मोड में हैं। पार्टी ने नगर निकाय चुनावों में न केवल जुगसलाई की सीट गंवा दी बल्कि, मानगो और चाकुलिया में भी पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। हालात यह रहे कि पूर्वी सिंहभूम जिले में भाजपा का खाता तक नहीं खुल सका। चुनाव के दौरान जहां-जहां जो खामी रही है इस पर पूरी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व ने तलब की है। प्रदेश स्तर पर इस बात की समीक्षा की जा रही है कि इस चुनाव में भाजपा से कहां चूक हुई। पार्टी का नया-नवेला संगठन भी उम्मीद पर खरा नहीं उतर सका।
चुनाव की समीक्षा का दौर चल रहा है। नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले भाजपा में संगठनात्मक बदलाव हुआ है। कहा जा रहा है कि यह बदलाव पार्टी को सूट नहीं कर पाया। चुनाव से पहले ही पूर्व जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा को किनारे कर जिले की कमान संजीव सिन्हा को सौंप दी गई थी। कहा जा रहा है कि इससे भाजपा की ब्रम्हण लॉबी नाराज हो गई। कहावत है कि एक तो करेला दूसरे नीम चढ़ा। जमशेदपुर की राजनीति में यह कहावत तब चरितार्थ हो गई जब मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद के चुनावों में भी ब्रम्हण वर्ग को दरकिनार कर दिया गया। यही नाराजगी नगर निकाय चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ी है।
सूत्रों की मानें तो अब भाजपा के आला पदाधिकारी शहर की सियासत से अवगत हो गए हैं। संगठन में नए बने पदाधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड देखा जा रहा है। समीक्षा चल रही है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व जल्द ही पूरे मामले की रिपोर्ट दिल्ली भेजेगा। इसके बाद इसे लेकर जमशेदपुर में भाजपा एक बड़ा अभियान चलाने की सोच रही है ताकि संगठन और उसके बाद नगर निकाय के चुनाव में जो लोग नाराज हो गए हैं उन्हें मनाया जा सके।
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नगर निकाय चुनाव (Jamshedpur Municipal Election ) के दौरान कई लोग भाजपा का दामन छोड़ कर चले गए थे। इनमें पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव समेत कई नाम हैं। मानगो की महिला नेत्री लक्की सिंह हैं। इसके अलावा जुगसलाई में भी ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। अब इन सबको वापस पार्टी में लेने की कवायद पर विचार चल रहा है। शहर से प्रदेश नेतृत्व को एक रिपोर्ट भेजी गई है जिसमें कहा गया है कि अगर इन नाराज नेताओं को वापस पार्टी में नहीं लिया गया तो आगे दिक्कत हो सकती है।
Jamshedpur Political News: मानगो में नहीं बन पाया भाजपा व जदयू में तालमेल
नगर निकाय चुनाव में मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद पर भाजपा का मजबूत दावा था। इन दोनों जगह भाजपा का अच्छा खासा वोट बैंक है। मानगो नगर निगम जिस इलाके में आता है वहां से जदयू के सरयू राय साल 2024 का विधानसभा चुनाव जीत कर विधायक बने हैं। ऐसे में माना जा रहा था कि सरयू राय मानगो में भाजपा का मेयर बनवा देंगे। सरयू राय ने इसके लिए एड़ी चोटी का जोर भी लगाया। तमाम राजनीतिक दांव-पेंच खेले। मगर, नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
मानगो से सरयू राय के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सुधा गुप्ता जीत गईं। यह जीत जहां विधायक सरयू राय के लिए झटका मानी जा रही है तो वहीं भाजपा के लिए भी खतरे की घंटी है। कहा जा रहा है कि मानगो में चुनाव के दौरान जदयू का संगठन उतना सक्रिय नहीं रहा जितना होना चाहिए था। जुगसलाई नगर परिषद में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार नौशीन खान ने जीत का परचम लहराया है। हालांकि, जुगसलाई में भाजपा का वोट बैंक अधिक है। इसके बाद भी नौशीन खान का जीत जाना किसी भाजपा नेता के गले से नहीं उतर रहा है।
Mango Municipal Corporation Election : स्टार प्रचारक भी दूर नहीं कर सके नाराजगी
जमशेदपुर में नगर निकाय चुनाव भाजपा की झोली में आ जाए इसके लिए पार्टी ने काफी मेहनत की थी। कई केंद्रीय मंत्रियों को स्टार प्रचारक के तौर पर भेजा गया था। इनमें रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शामिल हैं। संजय सेठ ने मानगो में रोड शो किया, तो गिरिराज सिंह जुगसलाई में गरजे। यहां भी गिरिराज का रोड शो हुआ।
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मानगो और जुगसलाई की अवाम से भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट देने की अपील भी की थी। इसके अलावा, संगठन के कई बड़े नेता मानगो और जुगसलाई में सक्रिय रहे। फिर भी यह दिग्गज यहां भाजपा को जीत नहीं दिला सके। राजनीतिक पंडितों का मानना है इसके पीछे भाजपा की कमजोरी रणनीति रही।
उम्मीदवारों को समर्थन देने के मामले में भाजपा का चुनाव सटीक नहीं था। इसके अलावा, मानगो और जुगसलाई दोनों सीटों पर राजपूत उम्मीदवार होने की वजह से भी बाकी हिंदू बिरादरी पार्टी से नाराज रही। इसका भी नतीजे पर असर पड़ा। मानगो में तो हिंदुओं का पिछड़ा वर्ग पार्टी से कट कर कांग्रेस की झोली में जा गिरा। अब भाजपा इन मतदाताओं को वापस भाजपा के साथ जोड़ने के लिए एक अभियान चलाने की प्लानिंग कर रही है।
Jamshedpur Municipal Election Result : नहीं चल पाई चाणक्य नीति
सुधा गुप्ता की जीत से सरयू राय को काफी झटका लगा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सरयू राय के पराभव की शुरुआत मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरयू राय ने जब विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्वी में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को हराया था तो वह उनकी सियासत का चरम था। अब मानगो मेयर चुनाव में वह अपने खेमे की उम्मीदवार संध्या सिंह नहीं जिता सके। यहां से उनकी राजनीति का ढलान शुरू हो गया है।
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