Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत सारंडा जंगल में IED ब्लास्ट में घायल हुए जंगली हाथी का इलाज तीसरे दिन भी जारी रहा। पशुपालन विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने काफी मशक्कत के बाद हाथी को काबू कर उसका उपचार किया।
टीम ने दिया एंटी बायोटिक और दर्द निवारक इंजेक्शन
मनोहरपुर प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. संजय घोलटकर, डॉ. बिसन सिंह और एक अन्य चिकित्सक तथा वन विभाग के कर्मियों ने मिलकर हाथी का इलाज किया। हाथी को रस्से से बांधकर एंटी बायोटिक, मल्टीविटामिन और दर्द व सूजन कम करने संबंधी इंजेक्शन दिए गए। इसके अलावा हाथी के घायल पैर की ड्रेसिंग भी की गई।
पैर में मौजूद मैगोट निकाले गए
डॉ. संजय घोलटकर ने बताया कि ड्रेसिंग के दौरान हाथी के पैर में मौजूद मैगोट को निकाला गया। हालांकि हाथी के बार-बार पानी में जाने के कारण काफी मैगोट खुद ही झड़ गए हैं। घाव में संक्रमण न फैले, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है।
पेड़ से बांधकर रखा गया हाथी
हाथी कहीं विचरण न कर पाए और इलाज में बाधा न आए, इसके लिए उसके कमर में रस्सा बांधकर उसे एक पेड़ से बांध दिया गया है। इससे चिकित्सकों को ड्रेसिंग और इंजेक्शन देने में आसानी हो रही है।
रक्त जांच जरूरी: चिकित्सक
डॉ. घोलटकर ने बताया कि हाथी खाना-पीना सामान्य रूप से कर रहा है, जो राहत की बात है। लेकिन, पैर के इन्फेक्शन की ताजा स्थिति जानने के लिए हाथी के रक्त के नमूने की तत्काल जांच किया जाना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट आने के बाद आगे का उपचार तय किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हाथी के पूरी तरह स्वस्थ होने तक इलाज लगातार जारी रहेगा। वन विभाग की टीम भी 24 घंटे हाथी की निगरानी कर रही है। सारंडा में नक्सलियों द्वारा लगाए गए IED से वन्यजीवों को लगातार नुकसान हो रहा है।

