Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी सैयद रियाज अहमद को कथित छेड़खानी मामले में बड़ी राहत दी है। जस्टिस एके चौधरी की एकल पीठ ने खूंटी महिला थाना में दर्ज मामले से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्रवाई और आरोप तय करने के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने यह फैसला दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुनाया।
दरअसल, सैयद रियाज अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को समाप्त करने की मांग की थी। इससे पहले खूंटी के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 4 सितंबर 2024 को उनके खिलाफ आरोप तय किए थे।
सुनवाई के दौरान अदालत में यह सामने आया कि मामले में छह गवाहों का परीक्षण हुआ था। इनमें से पांच गवाह अपने पहले बयान से मुकर गए, जबकि छठे गवाह की जानकारी प्रत्यक्ष नहीं बल्कि सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थी।
मामले में पीड़िता और याचिकाकर्ता ने संयुक्त रूप से हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बताया कि उनके बीच विवाद का समाधान हो चुका है और अब पीड़िता केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि समझौते और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम है। इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला जघन्य अपराध या गंभीर मानसिक विकृति की श्रेणी में नहीं आता।
अदालत ने माना कि यह पूरा विवाद आपसी गलतफहमी का परिणाम था, जिसे अब सुलझा लिया गया है। ऐसे में न्यायहित और अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए आपराधिक कार्रवाई को निरस्त किया जाना उचित है।
इसके बाद कोर्ट ने खूंटी महिला थाना केस से जुड़ी प्राथमिकी, आपराधिक कार्रवाई और 4 सितंबर 2024 को आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।
यह मामला जुलाई 2022 में तब चर्चा में आया था, जब खूंटी में एसडीओ के पद पर तैनात सैयद रियाज अहमद पर आईआईटी मंडी की एक छात्रा ने उनके सरकारी आवास पर आयोजित पार्टी के दौरान छेड़खानी की कोशिश का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद मामला दर्ज हुआ था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भी भेजा गया था। फिलहाल सैयद रियाज अहमद लातेहार में डीडीसी के पद पर कार्यरत हैं।
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