फीचर डेस्क : बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से अपनी सीमाएं साझा करने वाला राज्य झारखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ों और झरनों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों के बीच बसा है नेतरहाट, जिसे प्यार से ‘झारखंड का शिमला’ कहा जाता है। लातेहार जिले में स्थित यह छोटा-सा हिल स्टेशन अपनी मनमोहक वादियों, ठंडी जलवायु, घने जंगलों और अद्भुत सूर्योदय-सूर्यास्त के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है। आइए जानते हैं नेतरहाट के बारे में विस्तार से…

छोटानागपुर पठार का सबसे ऊंचा भाग है नेतरहाट
छोटानागपुर पठार का सबसे ऊंचा भाग है नेतरहाट
समुद्र तल से लगभग 1,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नेतरहाट छोटानागपुर पठार का सबसे ऊंचा और सुंदर क्षेत्र माना जाता है। यहां चारों ओर फैले साल, सखुआ और चीड़ जैसे पेड़ों के जंगल वातावरण को बेहद आकर्षक बनाते हैं। गर्मियों में भी यहां का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहाना रहता है, जबकि सर्दियों में तापमान काफी नीचे चला जाता है। नेतरहाट की पहाड़ियां, हरियाली और बादलों से ढकी घाटियां पर्यटकों को हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन शिमला की याद दिलाती हैं। यही वजह है कि इसे ‘झारखंड का शिमला’ कहा जाता है।
दिखता है सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नजारा

नेतरहाट में सूर्योदय का मनोरम दृश्य
। मैग्नोलिया पॉइंट से सूर्यास्त का दृश्य इतना मनोरम दिखाई देता है कि इसे देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। जब सूरज धीरे-धीरे पहाड़ियों के पीछे छिपता है, तब पूरा आकाश लाल, नारंगी और सुनहरे रंगों से भर जाता है। इसी तरह नेतरहाट का सूर्योदय भी बेहद आकर्षक होता है। सुबह की हल्की धुंध और उगते सूरज की किरणें घाटियों को स्वर्ग जैसी सुंदरता प्रदान करती हैं। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थान किसी जन्नत से कम नहीं है।

मैग्नोलिया पॉइंट
इस प्रेम कहानी से जुड़ी है मैग्नोलिया पॉइंट की पहचान
नेतरहाट का मैग्नोलिया पॉइंट केवल सूर्यास्त के लिए ही नहीं, बल्कि एक भावुक प्रेम कहानी के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रिटिश काल में मैग्नोलिया नामक एक अंग्रेज युवती को एक आदिवासी चरवाहे से प्रेम हो गया था। सामाजिक बंधनों के कारण दोनों का मिलन संभव नहीं हो सका। कहा जाता है कि इसी दुख में मैग्नोलिया ने इस पहाड़ी से छलांग लगा दी थी। आज यह स्थान प्रेम, त्याग और भावनाओं का प्रतीक माना जाता है और पर्यटक यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

नेतरहाट आवासीय विद्यालय
नेतरहाट आवासीय विद्यालय ने दिलाई शिक्षा के क्षेत्र में बेहद खास पहचान
नेतरहाट केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान रखता है। यहां स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय देश के प्रतिष्ठित विद्यालयों में गिना जाता है। वर्ष 1954 में स्थापित इस विद्यालय ने कई प्रशासनिक अधिकारियों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को देश को दिया है। विद्यालय का शांत वातावरण और प्राकृतिक परिवेश छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण के प्रमुख केंद्र
नेतरहाट आने वाले पर्यटक कई दर्शनीय स्थलों का आनंद ले सकते हैं। इनमें मैग्नोलिया पॉइंट, कोयल व्यू पॉइंट, अपर घाघरी जलप्रपात, लोअर घाघरी जलप्रपात और नेतरहाट डैम प्रमुख हैं। कोयल व्यू पॉइंट से बहती हुई कोयल नदी का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। वहीं घाघरी जलप्रपात की कलकल बहती धाराएं और आसपास की हरियाली पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
क्यों कहा जाता है झारखंड का शिमला
नेतरहाट को झारखंड का शिमला कहने के पीछे कई कारण हैं। यहां की ठंडी और सुखद जलवायु, ऊंची पहाड़ियां, घने जंगल, बादलों से ढकी घाटियां और प्राकृतिक सुंदरता इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाती है। जिस प्रकार शिमला हिमाचल प्रदेश की पहचान है, उसी प्रकार नेतरहाट झारखंड की प्राकृतिक पहचान बन चुका है। इसके अलावा यहां का शांत वातावरण, प्रदूषण मुक्त हवा और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है।

नेतरहाट बांध
हाल के वर्षों में झारखंड सरकार ने नेतरहाट को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। बेहतर सड़क संपर्क, आवास सुविधाओं और पर्यटन ढांचे के विकास से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
FAQ (Frequently Asked Questions)
नेतरहाट झारखंड के लातेहार जिले में स्थित एक छोटा सा हिल स्टेशन है। यह अपनी मनमोहक वादियों, ठंडी जलवायु, घने जंगलों और अद्भुत सूर्योदय-सूर्यास्त के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है।
समुद्र तल से लगभग 1,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नेतरहाट छोटानागपुर पठार का सबसे ऊंचा और सुंदर क्षेत्र माना जाता है
नेतरहाट की सबसे बड़ी पहचान यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त है। मैग्नोलिया पॉइंट से सूर्यास्त का दृश्य इतना मनोरम दिखाई देता है कि इसे देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रिटिश काल में मैग्नोलिया नामक एक अंग्रेज युवती को एक आदिवासी चरवाहे से प्रेम हो गया था। सामाजिक बंधनों के कारण दोनों का मिलन संभव नहीं हो सका। कहा जाता है कि इसी दुख में मैग्नोलिया ने इस पहाड़ी से छलांग लगा दी थी।
नेतरहाट केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान रखता है। यहां स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय देश के प्रतिष्ठित विद्यालयों में गिना जाता है।।
नेतरहाट आवासीय विद्यालय की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी। इस विद्यालय ने कई प्रशासनिक अधिकारियों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को देश को दिया है।
नेतरहाट में पर्यटकों के लिए आकर्षण के प्रमुख केंद्रों में मैग्नोलिया पॉइंट, कोयल व्यू पॉइंट, अपर घाघरी जलप्रपात, लोअर घाघरी जलप्रपात और नेतरहाट डैम शामिल हैं।
नेतरहाट को झारखंड का शिमला कहने के पीछे कई कारण हैं। यहां की ठंडी और सुखद जलवायु, ऊंची पहाड़ियां, घने जंगल, बादलों से ढकी घाटियां और प्राकृतिक सुंदरता इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाती है। जिस प्रकार शिमला हिमाचल प्रदेश की पहचान है, उसी प्रकार नेतरहाट झारखंड की प्राकृतिक पहचान बन चुका है।

