
Jamshedpur : लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग में 15 से अधिक बच्चों की मौत के बाद भी जमशेदपुर में सुरक्षा को लेकर लापरवाही जारी है। शहर के साकची, बिष्टुपुर, आमबगान और मानगो जैसे इलाकों में चल रहे कई बड़े कोचिंग संस्थान गंभीर खतरे के बीच संचालित हो रहे हैं।
रिहायशी क्षेत्रों की संकरी गलियों में बहुमंजिला इमारतों में संचालित इन संस्थानों में रोजाना हजारों छात्र पहुंचते हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर बुनियादी सुरक्षा इंतजाम तक नहीं हैं। कई कोचिंग सेंटरों में इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा नहीं है और आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगजनी या शॉर्ट सर्किट जैसी घटना होती है, तो दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पाएंगी और छात्रों को सुरक्षित निकालना मुश्किल हो जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन और कोचिंग संचालक इस गंभीर मुद्दे पर उदासीन बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शहर में भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जमशेदपुर में कोचिंग संस्थानों का कड़वा सच
– जमशेदपुर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में 350 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान और गाइडेंस सेंटर चल रहे हैं। इनमें से मात्र कुछ दर्जन ही जिला प्रशासन या संबंधित विभागों में आधिकारिक तौर पर निबंधित (रजिस्टर्ड) हैं। इन संस्थानों में 40 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं।
-शहर के 90% से अधिक कोचिंग संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। अधिकांश संस्थान बिना किसी वैध एनओसी या सुरक्षा ऑडिट के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के नियमों के अनुसार कोचिंग चलाने के लिए निम्नलिखित मानकों का पालन करना अनिवार्य है:
-हर संस्थान में अनिवार्य रूप से दो निकास द्वार (एंट्री और एग्जिट अलग-अलग) होने चाहिए। इसके अलावा क्रियाशील अग्निशामक यंत्र और रेत की बाल्टियां हर मंजिल पर मौजूद होनी चाहिए।
– क्लासरूम में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाना है। प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम एक वर्ग मीटर का स्थान निर्धारित है, ताकि आपात स्थिति में भगदड़ न मचे।
– संस्थान जिस भवन में चल रहा है, उसके पास नगर निकाय से ‘भवन स्थिरता प्रमाण पत्र’ होना चाहिए।
– प्राथमिक उपचार किट, साफ पेयजल और सीसीटीवी कैमरों की सक्रिय निगरानी अनिवार्य है।
क्या कहते हैं अभिभावक और विशेषज्ञ
-लखनऊ की घटना सुनकर रूह कांप जाती है। मेरा बेटा साकची की एक संकरी गली में तीसरी मंजिल पर कोचिंग जाता है। वहां सीढ़ियां इतनी पतली हैं कि दो लोग एक साथ ठीक से नहीं उतर सकते। हम मोटी फीस तो दे रहे हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। प्रशासन को तुरंत इन पर ताला लगाना चाहिए। रेखा मिश्रा अभिभावक
– ज्यादातर कोचिंग वाले सिर्फ पैसा कमाना जानते हैं। बेसमेंट और बिना खिड़की वाले कमरों में एसी लगाकर 80-80 बच्चों को ठूस दिया जाता है। अगर कभी आग लगी, तो बच्चे कहाँ जाएंगे? जब तक जमशेदपुर में कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक यहाँ का अग्निशमन विभाग नहीं जागेगा। प्रेम कुमार अभिभावक
क्या कहते हैं विषय विशेषज्ञ डॉ अफरोज आलम
– जमशेदपुर के कोचिंग सेंटरों का इंफ्रास्ट्रक्चर टाइम बम की तरह है। संकरी गलियों में स्थित इमारतों में वेंटिलेशन और इमरजेंसी एग्जिट का न होना सबसे बड़ा अपराध है। जिला प्रशासन को तुरंत एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर शहर के सभी संस्थानों का औचक निरीक्षण करना चाहिए। जिनके पास फायर एनओसी और दोतरफा निकास नहीं है, उन्हें तुरंत सील किया जाना चाहिए। सुरक्षा से समझौता यानी सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ है।

