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National Stakeholder Consultation का उद्घाटन : सीएम हेमंत सोरेन बोले- झारखंड की पहचान अब सिर्फ माइंस नहीं, माइंड्स से भी बनेगी

सिर्फ निवेश नहीं, दीर्घकालिक साझेदारी चाहिए : CM

by Nikhil Kumar
Hemant Soren
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  • रिसर्च से आगे बढ़कर इनोवेशन पर होगा फोकस, झारखंड अपना विकास मॉडल खुद बनाएगा
    100 वर्षों के यूरेनियम भंडार, माइका की वैज्ञानिक खोज और एआई आधारित विकास पर जोर

नई दिल्ली/रांची :  झारखंड को खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर ज्ञान, नवाचार और आधुनिक तकनीक आधारित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। नई दिल्ली में  बुधवार से शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उद्योग जगत, वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों और नीति विशेषज्ञों से कहा कि सरकार केवल निवेश आकर्षित करने की इच्छुक नहीं है, बल्कि झारखंड के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहती है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दूसरे दिन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे, जो राज्य के औद्योगिक और तकनीकी विकास को नई गति देंगे।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय कंसल्टेशन में आईटी, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, औद्योगिक विकास और पर्यटन जैसे विषयों पर व्यापक मंथन हो रहा है। कार्यक्रम में गूगल, आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद पहली बार विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहां मिले अनुभवों के आधार पर अब सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नीतियां तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे राज्य या देश का मॉडल अपनाने के बजाय झारखंड अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपना विकास मॉडल तैयार करेगा। “कॉपी-पेस्ट की संस्कृति” से विकास संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से एआई, डेटा और डिजिटल तकनीक की ओर बढ़ रही है। ऐसे में झारखंड को भी केवल उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मजबूत बिजली व्यवस्था, बेहतर आधारभूत संरचना, आधुनिक परिवहन, कुशल मानव संसाधन, डेटा आधारित शासन और उद्योगों के अनुकूल नीतिगत माहौल तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करना चाहती है, जहां तकनीक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक बनें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान लंबे समय से खनिज संपदा के कारण रही है। राज्य के 24 में से 14 जिलों में खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन अब समय वैज्ञानिक और टिकाऊ खनन का है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और एआई की मदद से खनन को अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है। साथ ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि झारखंड में यूरेनियम सहित कई क्रिटिकल मिनरल्स के विशाल भंडार हैं। वर्तमान आकलन के अनुसार राज्य में उपलब्ध यूरेनियम देश की जरूरतों को लगभग 100 वर्षों तक पूरा करने की क्षमता रखता है। यह राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने अभ्रक (माइका) का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी इसके वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण अपने अनुभव के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान कर लेते हैं, जहां माइका उपलब्ध है, लेकिन आधुनिक तकनीक अभी तक उसका सटीक मानचित्रण नहीं कर सकी है। उन्होंने तकनीकी कंपनियों और विशेषज्ञों से इस क्षेत्र में अनुसंधान और नई तकनीक विकसित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि माइका सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का वैज्ञानिक आकलन और आधुनिक तकनीक से दोहन संभव हो सके, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड केवल भूमिगत खनिजों का राज्य नहीं है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़, जंगल, जलप्रपात और जैव विविधता पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए हैं। सरकार पर्यटन को भी विकास के प्रमुख इंजन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है और इस विषय पर भी सम्मेलन में विस्तार से चर्चा होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश लाना नहीं है। उद्योगों, तकनीकी संस्थानों और वैश्विक कंपनियों के साथ ऐसी साझेदारी स्थापित करनी है, जो आने वाले वर्षों तक राज्य के साथ जुड़ी रहे और बदलती तकनीक तथा भविष्य की चुनौतियों का मिलकर समाधान निकाले। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन कई कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे आईटी, डिजिटल गवर्नेंस, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश को केवल कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज ही नहीं दिए हैं, बल्कि बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली अधिकारी, इंजीनियर, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से गूगल के प्रतिनिधि का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका संबंध पलामू से है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि झारखंड की प्रतिभाएं दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही हैं। अब जरूरत है कि इन्हीं प्रतिभाओं को राज्य के विकास से जोड़ा जाए।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की नई विकास यात्रा “माइंस से माइंड्स”, “रिसर्च से इनोवेशन” और “ग्रोथ से इन्क्लूसिव ग्रोथ” की अवधारणा पर आधारित होगी। उन्होंने सभी उद्योग प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और तकनीकी कंपनियों से झारखंड के विकास में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार सभी के सुझावों और सहयोग के साथ राज्य को तकनीक, नवाचार और समावेशी विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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