
Jamshedpur: जादूगोड़ा के रंकिनी मंदिर में प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना को लेकर पोटका प्रखंड के पांच आदिवासी गांवों में विरोध तेज हो गया है। मंगलवार शाम रोहणीबेड़ा समेत पांच गांवों की संयुक्त ग्राम सभा के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने जादूगोड़ा मोड़ चौक पर प्रदर्शन करते हुए पोटका विधायक संजीव सरदार का पुतला दहन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए, जिन्होंने पैदल मार्च निकालकर संवैधानिक ग्राम सभा को मान्यता देने और उसके अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि जादूगोड़ा स्थित रंकिनी मंदिर पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है। इसके बावजूद पर्यटन विभाग की करीब 19 करोड़ रुपये की विकास योजना ग्राम सभा की अनुमति के बिना संचालित की जा रही है। संयुक्त ग्राम सभा ने मांग की कि ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं किया जाए और वर्तमान योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए।
संयुक्त ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर वे पहले विधायक संजीव सरदार से भी मिले थे, लेकिन उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि अपनी बात रखने पर उन्हें उचित जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन को पांच बार लिखित आवेदन दिया गया और जांच के आदेश भी हुए, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान रोहणीबेड़ा, बड़ा झरना हिल, चाटीकोचा, टिलाईटांड़ और भाटीन गांव की संयुक्त ग्राम सभा ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों को रोक दिया। ग्रामीणों ने धूमकुड़िया भवन सहित विभिन्न निर्माण स्थलों पर पोस्टर लगाकर जांच पूरी होने तक गैर-जरूरी कार्य बंद रखने की घोषणा की।
संयुक्त ग्राम सभा के अध्यक्ष रणजीत टुडू ने राज्य सरकार से मांग की कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना चल रही 19 करोड़ रुपये की योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए और संवैधानिक ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच पूरी होने से पहले दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया गया और कोई अप्रिय घटना हुई, तो इसकी जिम्मेदारी ग्राम सभा की नहीं
होगी।

